ग्वालियर: राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के सप्तम दीक्षांत समारोह में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि उपाधियां प्रतिभा का प्रमाण होने के साथ समाज और राष्ट्र सेवा का संकल्प भी हैं। शिक्षा तभी शोभायमान होती है, जब उसमें संस्कृति की संवेदना हो। शुक्रवार को आरवीएस कृषि विश्वविद्यालय के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में आयोजित समारोह में 67 स्वर्ण पदक, 368 उपाधियां और 14 शोध उपाधियां प्रदान की गईं।
राज्यपाल ने युवाओं से भारतीय कला, संगीत और संस्कृति को विश्व पटल पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने तथा 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने विलुप्त होते लोक संगीत और कलाओं के संरक्षण, शोध एवं नवाचार पर जोर दिया। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने श्रवण, मनन और जीवन में ज्ञान धारण करने की परंपरा बताई। संस्कृति राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कला को व्यवसाय के साथ साधना बनाने की बात कही। कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे ने सत्य, कर्तव्य और सर्वजन हिताय का संकल्प दिलाया।
वर्ष 2024-25 की 115 स्नातक व 66 स्नातकोत्तर तथा 2025-26 की 113 स्नातक व 74 स्नातकोत्तर उपाधियां दी गईं। शोध उपाधियों में गायन की पांच, तबला की दो और चित्रकला की सात शामिल रहीं।
विशिष्ट सम्मान: आयुष मिश्र और अक्षत मिश्रा को पं. राजा भैया पूछवाले संगीत परिषद स्मृति स्वर्ण पदक, पुनीत कदवाने को स्व. पं. पीएल गोहदकर स्मृति पदक, अमिताभ आचार्य व विकास सिंह गोयल को स्व. शारदा महेंद्र सिंह स्मृति पदक तथा रजत सिंह व ऐश्वर्य दुबे को लाल रामशरण आनंद स्मृति स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।
तानसेन सम्मान से अलंकृत पं. अजय पोहनकर ने भजन और ठुमरी प्रस्तुत की। समारोह में भरतनाट्यम, सरस्वती वंदना और शक्ति आराधना की प्रस्तुतियां भी हुईं।
