सिंगरौली/देवसर शिक्षा के मंदिर में पढ़ने जाने वाले छात्र-छात्राओं को यदि गंदे पानी, दुर्गंध और बाजार के कचरे के बीच से होकर गुजरना पड़े, तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। देवसर में राष्ट्रीय राजमार्ग से शासकीय महाविद्यालय की ओर जाने वाली पीसीसी सड़क पर बह रहे गंदे पानी और जमा कचरे के कारण विद्यार्थियों सहित स्थानीय ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि इस मार्ग से शासकीय महाविद्यालय के 1000 से अधिक छात्र-छात्राएं प्रतिदिन आवागमन करते हैं। वहीं, स्थानीय ग्रामीणों सहित प्रतिदिन करीब दो से तीन हजार लोगों का इस रास्ते से आना-जाना होता है। इसके बावजूद सड़क पर बहते गंदे पानी और कचरे की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाने से लोगों में नाराजगी है।
बदबू के बीच आवागमन, जिम्मेदारों का ध्यान कब जाएगा?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि गंदे पानी से उठने वाली दुर्गंध के बीच विद्यार्थियों और ग्रामीणों को मजबूरी में गुजरना पड़ता है। पूर्व में भी कई नेताओं एवं जनप्रतिनिधियों के समक्ष यह समस्या उठाई जा चुकी है, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। ऐसे में सवाल उठता है कि हजारों लोगों के रोजाना इस्तेमाल में आने वाले इस सार्वजनिक मार्ग की बदहाली दूर करने के लिए ठोस पहल कब होगी?
प्रशासन से जनहित के मुद्दे पर ध्यान देने की अपील
स्थानीय लोगों ने जिला एवं स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि इस सार्वजनिक समस्या को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण कराया जाए। गंदे पानी की निकासी के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए और जमा कचरे की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि विद्यार्थियों को शिक्षा के मंदिर तक पहुंचने में परेशानी न हो और ग्रामीणों को भी राहत मिल सके।
जब प्रतिदिन हजारों लोग इस मार्ग से गुजरते हैं, तो उनकी सुविधा और स्वच्छता सुनिश्चित करना भी प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। विकास के दावे तभी सार्थक होंगे, जब उनका असर आमजन की रोजमर्रा की जिंदगी में दिखाई देगा।
