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नई दिल्ली, इंडिया गठबंधन ने पिछले कई दिनों से जारी आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए सोमवार को देशव्यापी मोर्चाबंदी करने का ऐलान किया है.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि रविवार को दिल्ली में युवाओं की आवाज दबाने की जो कोशिश की गई है, उसका जवाब देने के लिए अब सोमवार को पूरा इंडिया गठबंधन सड़कों पर उतरेगा. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को चार सूत्रीय मांग पत्र सौंपने के बाद अब विपक्षी गठबंधन ने सीधे तौर पर कानूनी और प्रशासनिक मोर्चे पर दबाव बढ़ाने की रणनीति बनाई है. इस रणनीति के तहत विपक्षी नेताओं का एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश से मिलकर इस संवैधानिक संकट और वोट चोरी के मुद्दे पर हस्तक्षेप के लिए एक औपचारिक ज्ञापन भी सौंपेगा. इसके साथ ही विपक्षी दलों के शीर्ष नेता और सांसद संसद परिसर में इकट्ठा होकर एकजुटता के साथ देश के लोकतांत्रिक ढांचे की रक्षा के लिए एक बड़ा मार्च निकालने की तैयारी में हैं. जानकारी के अनुसार इस महाआंदोलन में गठबंधन के कुल 23 राजनीतिक दल एक साथ शामिल हो सकते हैं. कांग्रेस पार्टी और ममता बनर्जी विपक्षी एकजुटता बनाए रखने के लिए आम आदमी पार्टी व डीएमके के नेताओं से बातचीत कर रहे हैं. शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट को भी अपने सांसदों को इस आंदोलन में शामिल होने के लिए कहा गया है.
विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे इस मामले को सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि एक गंभीर संवैधानिक संकट मानते हैं, इसलिए वे शीर्ष अदालत के समक्ष निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराएंगे. विपक्ष का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने निर्वाचन नियमावली और एसआईआर प्रक्रिया में मनमाने व एकतरफा बदलाव किए हैं तथा आयोग के बाकी दो चुनाव आयुक्तों की राय और असहमति को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है. इसी वजह से गठबंधन सुप्रीम कोर्ट से यह मांग करेगा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाया जाए और निर्वाचन आयोग में सत्ता के इस केंद्रीकरण पर तुरंत रोक लगाई जाए.
