इंदौर: टीबी के खिलाफ चल रही मुहिम में अब युवाओं को भी जोड़ा है, जिले के 12 विकासखंडों में गठित ‘टीबी मुक्त भारत’ की टीमें गांवों में लोगों के बीच जाकर टीबी से बचाव और इलाज को लेकर जागरूक करेंगी. गुरुवार को एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी ऑडिटोरियम में जिला स्तरीय कार्यक्रम के दौरान ‘जोश’ अभियान के तहत इन टीमों के काम की शुरुआत की गई.
इस दौरान हर टीम में प्रथम श्रेणी अधिकारी के साथ मेरा युवा भारत के 5 वालेंटियर और एनसीसी के 5 कैडेट शामिल हैं. टीम के सदस्य लोगों को टीबी को लेकर फैली भ्रांतियों से बाहर निकालने के साथ मरीजों को निर्धारित दवाओं का पूरा डोज लेने के लिए भी प्रेरित करेंगे. कार्यक्रम में दिल्ली से राष्ट्रीय स्तर पर हुए जोश अभियान के शुभारंभ का सजीव प्रसारण भी देखा. सांसद शंकर लालवानी ने अभियान का शुभारंभ करते हुए कहा कि इंदौर हर क्षेत्र में आगे रहता है और सभी के प्रयास से जल्द टीबी से भी मुक्त होगा. उन्होंने टीबी मुक्त भारत अभियान के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सामूहिक प्रयास पर जोर दिया.
टीबी मुक्त घोषित 135 पंचायतें सम्मानित
इस दौरान वर्ष 2025 में टीबी मुक्त घोषित जिले की 135 ग्राम पंचायतों को भी सम्मानित किया. इनमें 37 पंचायतों को स्वर्ण, 47 को रजत और 51 को कांस्य पदक दिए. संबंधित पंचायतों के सरपंचों ने पुरस्कार लिए. कार्यक्रम में जिला क्षय अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र जैन, जिला युवा अधिकारी पंकज गोस्वामी, शहरी विकासखंड चिकित्सा अधिकारी, पुरस्कृत पंचायतों के सरपंच और जोश टीम के सदस्य मौजूद रहे. कार्यक्रम के अंत में सीएमएचओ डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने नव भारत को बताया कि जोश अभियान के जरिए युवाओं को टीबी उन्मूलन से जोड़ना एक नई पहल है. युवाओं के माध्यम से लोगों को टीबी के बारे में समझाने पर बीमारी से जुड़े भ्रम और भ्रांतियां दूर करने में मदद मिलेगी. इससे टीबी उन्मूलन के लक्ष्य तक पहुंचने में आसानी होगी
