हिरणों के रेस्क्यू के लिए भारत पहुंचा दक्षिण अफ्रीका का दल

शुजालपुर, जिले में बढ़ती कृष्णमृगों की संख्या और किसानों की फसलों को हो रहे नुकसान के बीच वन विभाग एक बार फि र बड़े स्तर पर रेस्क्यू अभियान शुरू करने जा रहा है. कृष्णमृगों के रेस्क्यू के लिए दक्षिण अफ्र ीका की विशेषज्ञ टीम बुधवार को मुंबई पहुंच गई. गुरुवार को इंदौर पहुंचने के बाद टीम के शुजालपुर आएगी. दल का स्वागत शुजालपुर जटाशंकर के समीप किया जाएगा. इसके बाद 9 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक जिले के विभिन्न क्षेत्रों में रेस्क्यू अभियान चलेगा.

वन विभाग के अनुविभाग अधिकारी शाजापुर फ तेह सिंह निनामा ने बताया कि प्रदेश के वन अधिकारियों के मार्गदर्शन में अभियान संचालित किया जाएगा. वन मंडल अधिकारी उत्पादन देवास प्रभुरंजन रेड्डी एवं वन मंडल अधिकारी सामान्य देवास एवं प्रभारी डीएफ ओ शाजापुर अमित सिंह चौहान के नेतृत्व में चलने वाले इस अभियान में मैदानी स्तर पर वन विभाग के 120 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी शामिल होंगे. इसके अलावा अन्य विभागों के अधिकारी व कर्मचारियों का भी सहयोग अभियान में लिया जाएगा. इस वर्ष वन विभाग ने करीब 2000 कृष्णमृगों के रेस्क्यू का लक्ष्य रखा है. इसके लिए दक्षिण अफ्रीका में प्रचलित बोमा पद्धति का उपयोग किया जाएगा.

हेलीकॉप्टर से हांका लगाकर बोमा तक लाए जाएंगे कृष्णमृग

खुले खेतों और बड़े मैदानी क्षेत्रों में वन्यजीवों को एक स्थान पर एकत्र करना चुनौतीपूर्ण होता है. बोमा पद्धति में बड़े क्षेत्र में पर्देनुमा घेरा तैयार किया जाता है. हेलीकॉप्टर की मदद से वन्यजीवों को धीरे-धीरे इस घेरे की ओर हांका जाता है. इसके बाद उन्हें सुरक्षित रूप से बोमा तक लाकर वाहनों के माध्यम से निर्धारित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाता है.

पिछले वर्ष 21 दिन में रेस्क्यू किए थे 913 वन्यजीव

गत वर्ष दक्षिण अफ्र ीका की कंजर्वेशन सॉल्यूशंस टीम और वन विभाग की टीम द्वारा हेलीकॉप्टर एवं बोमा पद्धति से कृष्णमृगों के रेस्क्यू का पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था. यह अभियान 15 अक्टूबर से 4 नवंबर 2025 तक 21 दिन चला था. इस दौरान जिले से कुल 913 वन्यजीवों को रेस्क्यू किया गया, जिनमें 846 कृष्णमृग और 67 नीलगाय शामिल थीं.

20 हजार कृष्ण मृग और 2 हजार नील गाय

शाजापुर जिले में कृष्णमृगों की संख्या करीब 20 हजार और नीलगायों की संख्या करीब 2 हजार अनुमानित है. फ सलों को वन्यजीवों से होने वाले नुकसान के चलते किसान लंबे समय से इनके रेस्क्यू की मांग करते आ रहे हैं. ऐसे में पिछले वर्ष के सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद शुरू होने वाला यह अभियान वन्यजीव संरक्षण के साथ किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

शुजालपुर में तैयार हो रहा हेलिपैड

रेस्क्यू अभियान के लिए शुजालपुर में स्कॉलर्स एकेडमी के खेल मैदान प्रशासन द्वारा में हेलिपैड तैयार किया जा रहा है. आवश्यकता पडऩे पर कालापीपल और पोलायकलां में पहले से बने हेलिपैड का भी उपयोग किया जाएगा. वन विभाग ने बोमा लगाए जाने के संभावित स्थान भी चिन्हित कर लिए हैं. दक्षिण अफ्र ीकी विशेषज्ञ दल के साथ बैठक के बाद इन स्थानों को अंतिम रूप दिया जाएगा.

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