
रीवा, सिरमौर क्षेत्र के रोझौली और सरई कला में प्रस्तावित टाटा पावर न्यूक्लियर प्लांट का लगातार ग्रामीण विरोध कर रहे है. कई एकड़ में बनने वाले इस पावर प्लांट का विरोध शुरू से ही चल रहा है. बीच में टेस्टिंग के लिये पहुंची बोरिंग मशीनों को ग्रामीणों ने वापस कर दिया था. अब स्थानीय ग्रामीणों ने कलेक्टर के यहा शिकायती आवेदन लगाया है. दरअसल ग्रामीण अपनी निजी भूमि और घरों को लेकर चिंतित है. रीवा के सिरमौर क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा पावर परमाणु ऊर्जा संयंत्र को लेकर रोझौही, सरई कलां समेत आसपास के गांवों में विरोध हो रहे हैं.
प्रस्तावित प्रोजेक्ट के लिए करीब 200 एकड़ जमीन की बात सामने आई है. अभी प्रोजेक्ट शुरुआती प्रक्रिया में हैं और प्लांट का निर्माण शुरू नहीं हुआ है. इसी दौरान रोझौही और सरई कलां में जमीन की जांच के लिए ड्रिलिंग मशीनें पहुंचीं. ग्रामीणों के विरोध के बाद मशीनें वापस लौट गई थी. रोझौही के सरपंच कोमल सिंह के मुताबिक, प्रोजेक्ट को लेकर ग्रामसभा में आपत्ति दर्ज की गई. ग्रामसभा ने प्रस्ताव का विरोध किया. ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामसभा में विरोध के बाद भी जमीन से जुड़ी गतिविधियां होने से उनकी नाराजगी बढ़ी है. ग्रामीण अमित वैश्य का आरोप है कि प्रोजेक्ट से जुड़ी गतिविधियां उनकी जमीन पर उनकी सहमति के बिना शुरू की गई. उनका कहना है कि यदि जमीन पर कोई जांच या दूसरी गतिविधि होनी है तो संबंधित जमीन मालिकों को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए. ग्रामीणों का सवाल है कि जब ग्रामसभा में प्रस्ताव का विरोध किया जा चुका है तो जमीन की जांच और टैगिंग क्यों की जा रही है. मामले की शिकायत कलेक्टर के यहा भी की गई है.
