
सतना। बिरहुली रेलवे फाटक पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज की धीमी रफ़्तार की वजह से लोगों में आक्रोश पनप रहा है, निर्माण कंपनी द्वारा हो रही देरी और प्रशासनिक लापरवाही पर राहगीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
सतना और सेमरिया को जोड़ने वाला यह मार्ग व्यापारिक और आवागमन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है ऐसे में निर्माण कार्य शुरू हुये तीन वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी ब्रिज निर्माण पूरा नहीं होने से स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों में को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है एंबुलेंस, स्कूली बसें और दफ्तर आने जाने वाले लोग समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं लेकिन प्रशासनिक अमला निर्माण एजेंसी पर मेहरबान है लोगों का आरोप है कि तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी अभी तक निर्माण एजेंसी कम पूरा नहीं कर पाई बावजूद इसके ज़िम्मेदार मौन है ठेकेदार के ख़िलाफ़ कार्यवाही नहीं कर रहे हैं अधर में अटकें ब्रिज निर्माण के कारण राहगीरों को तक़रीबन 05 किलोमीटर लंबे वैकल्पिक मार्ग से होकर गुज़रना पड़ता है राहगीरों का समय भी ख़राब होता है और उन पर ईधन का भी अतिरिक्त बोझ पड़ता है सवाल यह भी है कि कई एक्सटेंसन मिलने के बाद भी निर्माण कार्य जस का तस है और ओवर ब्रिज राहगीरों के लिए कब तक चालू होगा इस सवाल का उत्तर किसी जिम्मेदार के पास नहीं है।
वैकल्पिक मार्ग हुआ बदहाल
ब्रिज निर्माण से बाधित मार्ग के लिए बनाया गया वैकल्पिक मार्ग पूरी तरह जर्जर हो चुका है बड़े – बड़े गड्ढे और उड़ती धूल के गुबार से राहगीर और स्थानीय लोग परेशान हैं निर्माण एजेन्सी द्वारा वैकल्पिक मार्ग में धूल से राहत के लिए ना तो पानी डाला जाता है ना गड्ढे भरे जाते हैं ऐसे में दुर्घटना होने की संभावना बनी ही रहती है
1. निर्माण कार्य पूरा नहीं होने से हमे पाँच किलोमीटर घूम कर जाना पड़ता है जिससे ईधन की बर्बादी होती है और समय बर्बाद होता है ब्रिज का काम जल्दी से जल्दी होना चाहिए। अतुल तिवारी, राहगीर
2. ब्रिज का काम पूरा नहीं होने से कॉलेज पहुँचने के लिए घर से पहले निकलना पड़ता है वैकल्पिक मार्ग में कॉलेज से पहुँचने से पहले धूल से कपड़े ख़राब हो जाते हैं कई बार कॉलेज पहुँचने में देरी होती है – नैतिक सेन
3. ब्रिज का निर्माण कार्य अब स्थानीय रहवासी और राहगीरों के लिए चुनौती बन चुका है ठेकेदार को अधिकारियों का डर ही नहीं है इसीलिए काम की रफ़्तार धीमी है जिसका ख़ामियाज़ा आम जनता उठा रही है। – दिलीप शुक्ला
