
ग्वालियर। शहर के सरकारी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की तस्वीर तेजी से बदल रही है। कभी अव्यवस्था और संसाधनों की कमी के लिए चर्चित रहा यह हॉस्पिटल अब फाइव स्टार सुविधाओं की कवायद में जुटा है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं और नई सुविधाओं को देखकर मरीजों और परिजनों में भी संतोष है।
अस्पताल परिसर में साफ-सफाई, नई ओपीडी व्यवस्था, डिजिटल रजिस्ट्रेशन, वातानुकूलित वार्ड और विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता ने इसे निजी अस्पतालों के समकक्ष खड़ा कर दिया है। सुपर स्पेशलिटी विंग में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज अत्याधुनिक मशीनों से किया जा रहा है।
अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि शासन स्तर से बजट और संसाधन लगातार मिल रहे हैं। मरीजों को अब जांच और ऑपरेशन के लिए बाहर भटकना नहीं पड़ रहा है। अधिकांश जांचें और दवाएं अस्पताल परिसर में ही निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी गति से सुविधाओं में बढ़ोतरी होती रही, तो वह दिन दूर नहीं जब ग्वालियर का यह सरकारी हॉस्पिटल दिल्ली के मेदांता, पंत और अपोलो जैसे बड़े निजी अस्पतालों की दौड़ में शामिल होगा। कम खर्च में बेहतर इलाज मिलने से आम लोगों के साथ-साथ आसपास के जिलों के मरीजों का भरोसा भी इस पर बढ़ा है।
इनका कहना है
हमारे यहां नया पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग शुरू हुआ है। यह सुविधा अभी प्राइवेट में भी कहीं नहीं है। विभाग शुरू होते ही मरीजों की लाइन लग रहीं है। रोज़ बच्चों के कई इंटरवेंशन और प्रोसीजर हो रहे हैं। किडनी ट्रांसप्लांट भी चालू हो गया है, जिससे आयुष्मान योजना वाले गरीब मरीजों के लिए रास्ता साफ हुआ है। हर रोज ओपीडी भरी रहती है। हां, यह जरूर है कि कभी-कभी लाइट की वजह से सर्वर में दिक्कत आती है।
नीलिमा टंडन, सुप्रिटेंडेंट सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल
मेरे तीन साल के बेटे दिव्यांश को पॉटी के रास्ते मे दिक्कत है। शहर में इस हॉस्पिटल के मुकाबले मुझे और कोई हॉस्पिटल नहीं समझ मे आया। यहां बिल्कुल प्राइवेट जैसी सुविधएं है। आयुष्मान से बिल्कुल फ्री इलाज होता है। डॉक्टर से लेकर स्टाफ तक सभी मरीजों एवं उनके अटेंडरों से बहुत अच्छा व्यवहार करते है।
पूरन बाथम
निवासी बिलौआ ग्वा
सायकिल चलते समय मैं गिर गया था जिससे मेरी आंत फट गई थी मेरे पापा मुझे इस हॉस्पिटल में लाये। फरवरी में डॉक्टरों ने मेरा ऑपरेशन कर दिया। उसके बाद मैं पूरी तरह स्वस्थ्य हो गया। मैंने खुद लापरवाही करते हुए मोमोज चाउमीन जैसी बाहर की चीजें खाना शुरू कर दिया था, उसके कारण मेरी आंत में छाले पड़ गए, अब उसका इलाज चल रहा है।
अभय चौरसिया, मरीज
कोंच, जिला जालौन
