मुंबई, देश के सबसे व्यस्त और प्रमुख छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (CSMIA) के टर्मिनल-1 (T-1) से उड़ानों के संचालन को अस्थायी रूप से बंद करने के प्रस्ताव ने नागरिक उड्डयन क्षेत्र में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। एयरपोर्ट अथॉरिटी और अडानी एयरपोर्ट्स द्वारा एयरलाइंस को अपना परिचालन नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शिफ्ट करने का विकल्प दिए जाने के बाद से स्थिति गरमा गई है। इस बीच, इस पूरे गतिरोध और एयरलाइंस की चिंताओं को दूर करने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCo) के सचिव समीर सिन्हा की अध्यक्षता में आज एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें अडानी समूह और प्रमुख एयरलाइंस के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय संस्था IATA ने एकतरफा ट्रांसफर का किया तीखा विरोध, पारदर्शी परामर्श और ORAT प्रक्रिया अपनाने की मांग
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) ने इस एकतरफा और जबरन स्थानांतरण प्रस्ताव पर अपना गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव को औपचारिक पत्र लिखा है। IATA का स्पष्ट कहना है कि किसी भी हवाई अड्डे से परिचालन का स्थानांतरण पूरी तरह स्वैच्छिक, व्यावसायिक रूप से टिकाऊ और व्यावहारिक होना चाहिए। वैश्विक संस्था ने जोर दिया है कि इस तरह के बड़े बदलावों के लिए एक व्यापक ‘ऑपरेशनल रेडीनेस एंड एयरपोर्ट ट्रांसफर’ (ORAT) प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है, जिसमें सभी एयरलाइन हितधारकों की सहमति शामिल हो। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का हवाला देते हुए सुझाव दिया गया है कि मौजूदा क्षमता बनाए रखते हुए पुनर्विकास कार्य चरणबद्ध तरीके से किए जाने चाहिए।
लगभग 4-5 साल का समय लगेगा पुनर्विकास में, आखिरी छोर तक कनेक्टिविटी और क्रू की व्यवस्था को लेकर एयरलाइंस परेशान
मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 के पूर्ण पुनर्विकास (Redevelopment) में लगभग 4 से 5 साल का लंबा समय लगने का अनुमान है, जिसके चलते एयरलाइंस को नवी मुंबई शिफ्ट होने का विकल्प दिया गया है। हालांकि, कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इतने लंबे समय के लिए अचानक शिफ्ट होने से लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, ग्राउंड हैंडलिंग स्टाफ, मेंटेनेंस टीम और फ्लाइट क्रू के आवागमन व रहने जैसी गंभीर परिचालन चुनौतियां पैदा हो जाएंगी। आज दोपहर होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस मामले में एयरलाइंस और एयरपोर्ट ऑपरेटर्स के बीच क्या बीच का रास्ता निकालता है।

