
धामनोद। नए गणेश घाट बायपास पर वाहनों पर हुए सनसनीखेज पथराव मामले में धामनोद पुलिस ने दो युवकों को आरोपी बताते हुए दावा किया है कि वाहन चालक उनके रोकने पर नहीं रुकते थे, इसलिए गुस्से में आकर उन्होंने वाहनों पर पत्थर फेंके। लेकिन पुलिस की यह थ्योरी अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है।
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों के बीच चर्चा है कि क्या महज वाहन नहीं रुकने जैसी बात पर लगातार गुजरते वाहनों को निशाना बनाकर दहशत फैलाना संभव है? यदि ऐसा था तो फिर कई वाहनों को चुन-चुनकर निशाना क्यों बनाया गया? और सबसे बड़ा सवाल यह कि इसी गणेश घाट क्षेत्र में पूर्व में भी पथराव की बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं, जिनके पीछे कौन लोग थे, इसका स्पष्ट खुलासा आज तक नहीं हो पाया।
पुरानी घटनाओं का सच आज भी अधूरा – गणेश घाट क्षेत्र में पहले भी वाहनों पर पथराव की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। उस समय भी पुलिस ने कार्रवाई और सख्ती के दावे किए थे, लेकिन क्षेत्र में दोबारा हुई घटना ने उन दावों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। हाल ही में 8 से 10 वाहनों पर पथराव और एक व्यक्ति के घायल होने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी थी। यदि पूर्व की घटनाओं के वास्तविक आरोपी पूरी तरह सामने आ गए थे और क्षेत्र में प्रभावी निगरानी थी, तो फिर वही इलाका दोबारा अपराधियों का निशाना कैसे बन गया?
जांच जल्दबाजी में पूरी कर दी गई?
पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट में आरोपियों के कथित बयान को ही घटना का प्रमुख कारण बताया गया है। लेकिन कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं—
क्या आरोपियों के पास से घटना से जुड़े अन्य साक्ष्य मिले? क्या घटनास्थल के तकनीकी साक्ष्य, सीसीटीवी या अन्य प्रमाण इस कहानी की पुष्टि करते हैं?, क्या केवल कथित स्वीकारोक्ति के आधार पर पूरे घटनाक्रम का निष्कर्ष निकाल दिया गया?, क्या पुलिस यह स्पष्ट करेगी कि पूर्व की पथराव घटनाओं और वर्तमान घटना के बीच कोई संबंध है या नहीं?, हाईवे पर सुरक्षा या सिर्फ औपचारिक कार्रवाई?, मुंबई-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग का गणेश घाट क्षेत्र पहले से संवेदनशील माना जाता रहा है। हाल की घटना के बाद वाहन चालकों में भय का माहौल बना था और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।, अब जबकि पुलिस ने दो आरोपियों मुकुट पिता कैलाश बड़ुकिया, 25 वर्ष एवं मनीष पिता दिनेश बादुकिया दोनों निवासी कोठिडा पटेलपुरा की गिरफ्तारी दिखाकर अपनी पीठ थपथपाते हुए मामले के खुलासे का दावा किया है । आमजन यह जानना चाहते हैं कि क्या वास्तव में पूरा सच सामने आ गया है, या फिर हाईवे पर बार-बार हो रही घटनाओं के पीछे मौजूद बड़े सवाल अभी भी जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
जनता पूछ रही है . . .
1. पहले हुए पथराव मामलों के असली आरोपी कौन थे?
2. यदि पुलिस की निगरानी मजबूत थी तो घटना दोबारा कैसे हुई?
3. क्या केवल दो युवकों की गिरफ्तारी से पूरा रहस्य सुलझ गया?
4. हाईवे पर यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन तय करेगा?
णेश घाट की पहाडिय़ों में गूंजता सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या पुलिस ने अपराध की जड़ तक पहुंच बनाई है, या सिर्फ घटना का एक आसान जवाब तलाश लिया गया है?
