भोपाल। मध्य प्रदेश के बालाघाट के बैगा बहुल इलाकों में बच्चों की मौत का मामला गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों की ओर ध्यान खींच रहा है। जांच में खसरा, मलेरिया, कुपोषण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के मामले सामने आए हैं। उपलब्ध जांच के आधार पर सभी मौतों को किसी एक बीमारी से जोड़ना सही नहीं होगा।
*कुपोषण और संक्रमण बड़ा जोखिम*
कुपोषण बच्चों की बीमारी से लड़ने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में मलेरिया और खसरा जैसे संक्रमण गंभीर रूप ले सकते हैं। अगस्त में हुई जांच में कुछ बच्चों की मौत में खसरा और मलेरिया की पुष्टि की गई थी, जबकि बाद की केंद्रीय जांच में अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं का उल्लेख हुआ।
*स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की चुनौती*
दूर-दराज के आदिवासी इलाकों में बीमारी की समय पर पहचान, जांच और गंभीर मरीज को बड़े स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना अहम है। इसी वजह से प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी, जांच और मरीजों के रेफरल पर स्वास्थ्य विभाग ने काम बढ़ाया है।
सरकार ने बालाघाट में 67 नए मेडिकल ऑफिसर तैनात किए हैं। इसके अलावा दो नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, एक उप-स्वास्थ्य केंद्र और दो मोबाइल मेडिकल यूनिट की व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 2 करोड़ रुपये भी स्वीकृत किए गए हैं। बच्चों के पूर्ण टीकाकरण पर भी जोर दिया गया है।
*जांच में क्या सामने आया?*
मामले की जांच में बच्चों की बीमारी, संक्रमण और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े पहलुओं को देखा गया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी 30 से अधिक बच्चों की मौत से जुड़े मामले में राज्य के संबंधित विभागों और अधिकारियों से जवाब मांगा है।
*मौतों के आंकड़े पर अलग-अलग जानकारी*
मौतों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। एक रिपोर्ट में प्रशासन की ओर से 32 बच्चों की मौत की पुष्टि बताई गई है,वहीं बैहर विधायक संजय उइके ने 43 मौतों का दावा किया है।
*राहुल गांधी का दौरा और राजेंद्र शुक्ल का पलटवार*
1 अक्टूबर को राहुल गांधी बालाघाट के जगला गांव पहुंचे और प्रभावित बैगा परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण, शिक्षा और सरकारी योजनाओं से जुड़े मुद्दों पर परिवारों से जानकारी ली।
राहुल गांधी के दौरे के बाद उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इसे ‘पॉलिटिकल टूरिज्म’ बताया और कांग्रेस के शासनकाल में बालाघाट के नक्सल प्रभावित रहने का मुद्दा उठाया। शुक्ल ने सरकार की ओर से स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने के लिए किए गए कदमों का भी उल्लेख किया।
फिलहाल मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि बच्चों की मौतों के पीछे बीमारी, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कौन-कौन से कारक रहे और जांच के अंतिम निष्कर्ष क्या सामने आते हैं।
