
सागर। बंडा में जहरीली शराब से हुई 32 मौतों के मामले में पुलिस जांच में अहम खुलासा हुआ है। जांच के अनुसार, मुख्य आरोपियों को शराब के अमानक और जानलेवा होने की जानकारी पहले ही मिल गई थी। इसके बावजूद शराब की आपूर्ति और बिक्री नहीं रोकी गई और प्रशासन को भी सूचना नहीं दी गई।
मामले में पुलिस ने 52 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है, जिनमें से 36 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ हत्या की धारा जोड़ने की कानूनी तैयारी की जा रही है।
जेल से मिले सुराग से गिरोह तक पहुंची पुलिस
घटना के बाद 5 सितंबर की रात अस्पताल में मरीजों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ था। मरीजों में उल्टी, बेहोशी और धुंधला दिखाई देने जैसी शिकायतें सामने आईं। देर रात मौतें होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस को केंद्रीय जेल सागर से एक गोपनीय सूचना मिली। अगस्त में जेल में बंद शिवांजय सिंह राजपूत ने अपने साथी को शराब बनाने का फॉर्मूला उपलब्ध होने की बात बताई थी। पुलिस ने उसकी कॉल डिटेल और लोकेशन की जांच की तो उसका संबंध ततरवारा निवासी चंद्रभान सिंह राजपूत उर्फ चंदू राजा से सामने आया।
इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और पूरे अंतरराज्यीय गिरोह तक पहुंचने का दावा किया। अब पुलिस मामले में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका और कानूनी धाराओं की समीक्षा कर रही है।
