No UPI Day Strike:
देशभर के दुकानदारों और व्यापारियों ने 2 अक्टूबर को जो ‘No UPI Day’ मनाने का ऐलान किया था, उसे अब रद्द कर दिया गया है। पहले खबर आई थी कि गांधी जयंती के दिन व्यापारी अपना यूपीआई QR कोड, स्कैनर और साउंड बॉक्स को काले कपड़े से ढककर विरोध जताएंगे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, क्योंकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के आश्वासन पर व्यापारी संगठनों ने भरोसा जताया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बैठक के बाद दो बड़े संगठनों- ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) और ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF) ने इस हड़ताल को वापस लेने का फैसला किया है।
जानिए विरोध का असली कारण
दरअसल सरकार 15 अक्टूबर से एक नया नियम लागू करने जा रही है। इस नियम के तहत 2,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR शुल्क लगेगा। यह शुल्क दुकानदारों से लिया जाएगा। इस मामले में व्यापारी संगठनों का कहना था कि इससे छोटे दुकानदारों पर बोझ बढ़ेगा। उनका मुनाफा पहले से ही बहुत कम है, ऊपर से ये नया चार्ज उनकी कमर तोड़ देगा। इसी के खिलाफ महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन, फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर समेत कई संगठनों ने 2 अक्टूबर को विरोध का फैसला किया था।
निर्मला सीतारमण से मिला आश्वासन
30 सितंबर को दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के दफ्तर में करीब 20 बड़े व्यापारी नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक का नेतृत्व चांदनी चौक के सांसद और कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने किया। बैठक में व्यापारियों ने अपनी चिंता खुलकर रखी। उन्होंने कहा कि त्योहार का सीजन आ रहा है, ऐसे समय में नया चार्ज लगाना सही नहीं है। इसके बाद वित्त मंत्री ने उन्हें भरोसा दिया कि उनकी सभी चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि बातचीत बहुत अच्छी रही। वित्त मंत्री ने उनकी बात धैर्य से सुनी और आश्वासन दिया कि व्यापारियों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। इसी आश्वासन के बाद AIMRA और AICPDF ने हड़ताल रद्द कर दी।
व्यापारियों ने सरकार के सामने रखी हैं ये मांगें
व्यापारियों ने सरकार के सामने 4 बड़ी मांगें रखी हैं, जिसपर सरकार ने विचार करने का भरोसा दिया है…
पहली मांग: MDR को अभी तुरंत लागू न किया जाए, इसे कुछ समय के लिए टाल दिया जाए।
दूसरी मांग: एक साथ 0.40 प्रतिशत न लगाकर धीरे-धीरे लागू किया जाए। जैसे पहले साल 0.20 प्रतिशत, फिर हर साल 0.05 प्रतिशत बढ़ाकर 0.40 तक ले जाया जाए।
तीसरी मांग: जिस दुकानदार का सालाना UPI कारोबार 1 लाख रुपये है, उस पर MDR लगता है, इस लिमिट को बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जाए।
चौथी मांग: दुकानदार से दुकानदार के बीच होने वाले लेनदेन को इस MDR से बाहर रखा जाए। साथ ही एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई जाए जो इस पूरे मामले को ठीक से समझे।
ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा MDR चार्ज
सरकार और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने साफ कहा है कि यह MDR चार्ज ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा। यह सिर्फ दुकानदार और बैंक के बीच का मामला है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक करीब 96 प्रतिशत दुकानदारों के UPI लेनदेन पर कोई असर नहीं पड़ेगा और कुल लेनदेन के 70 प्रतिशत हिस्से पर MDR नहीं लगेगा।
साथ ही सरकार ने कहा कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किया गया UPI ट्रांसफर पूरी तरह से फ्री रहेगा, चाहे रकम कितनी भी हो। 2,000 रुपये तक की खरीदारी पर भी कोई MDR नहीं लगेगा। सरकार जल्द ही CAIT समेत सभी बड़े व्यापारी संगठनों के साथ एक और बैठक करेगी। इसके अलावा लोगों में जो भ्रम फैला है कि दुकानदार अब ग्राहकों से ही ये पैसा वसूलेंगे, उसे दूर करने के लिए IBA एक जागरूकता अभियान भी चलाएगा।
फिलहाल 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ऊपर के UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR का नियम लागू होने जा रहा है, लेकिन 75,000 रुपये से ऊपर के लेनदेन पर अधिकतम 300 रुपये ही चार्ज लगेगा।
