जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने एक वर्ष में पांच बार स्थानांतरण से प्रभावित जूनियर सप्लाई आफिसर के स्थानांतरण आदेश के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने मामले में राज्य शासन सहित संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई दो दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
याचिकाकर्ता का सागर से अलीराजपुर स्थानांतरण किया गया था। आवेदक की ओर से न्यायालय को बताया कि पिछले एक वर्ष में याचिकाकर्ता का पांच बार स्थानांतरण किया गया। लगातार तबादलों के कारण उसे बार-बार पदस्थापना स्थल बदलना पड़ा। याचिका में मध्यप्रदेश की स्थानांतरण नीति के क्लाज-19 के उल्लंघन का भी हवाला दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि उसकी मां और पत्नी दोनों को चिकित्सकीय उपचार की आवश्यकता है। इस संबंध में मेडिकल दस्तावेज भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
इन्हीं परिस्थितियों और स्थानांतरण नीति के प्रावधानों को आधार बनाकर अंतरिम राहत की मांग की गई थी। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 13 जून 2026 और 21 सितंबर 2026 को जारी विवादित स्थानांतरण आदेशों के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर रोक लगा दी। इसके चलते फिलहाल याचिकाकर्ता सागर में वर्तमान पदस्थापना पर कार्यरत रह सकेगा। राज्य शासन को चार सप्ताह में जवाब और उसके बाद याचिकाकर्ता को तीन सप्ताह में प्रत्युत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले में अंतिम निर्णय आगामी सुनवाई पर होगा।
