जबलपुर: मध्य प्रदेश में नई न्यायालयीन इमारतों के निर्माण को लेकर हाई कोर्ट की सख्ती के बाद सरकार ने 644.85 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी दिए जाने की जानकारी दी है। चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे व जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि केवल वित्तीय स्वीकृति पर्याप्त नहीं है, अब परियोजनाओं का काम जमीन पर शुरू किया जाए। न्यायालय ने कोर्ट मित्र को प्रदेश के अन्य जिलों में न्यायालयीन भवनों और संबंधित परियोजनाओं की जरूरत का आंकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।
दरअसल मामला अनूपपुर के अधिवक्ता बासुदेव चटर्जी की जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका के अनुसार अनूपपुर जिला न्यायालय वर्ष 2009 से किराए के भवन में संचालित है और नई इमारत का प्रस्ताव तीन फरवरी 2021 से लंबित था। 28 जुलाई की सुनवाई में हाईकोर्ट ने वित्त सचिव और विधि सचिव को तलब किया था। 12 अगस्त को दोनों अधिकारियों की मौजूदगी में सुनवाई हुई थी। मामले में आगे हुई सुनवाई दौरान सरकार ने वित्तीय मंजूरी का विवरण पेश किया।
जिसमें बताया गया कि सात सितंबर को न्यायपालिका की विभिन्न परियोजनाओं के लिए 644.85 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इनमें 600 करोड़ रुपये विभिन्न न्यायिक परियोजनाओं और 44.85 करोड़ रुपये अनूपपुर जिला न्यायालय की नई इमारत के लिए हैं। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि स्वीकृत परियोजनाओं का क्रियान्वयन शुरू किया जाए। इसके साथ ही न्यायालय ने कोर्ट मित्र अंशुमान सिंह से अन्य जिलों की जरूरतों की रिपोर्ट भी मांगी।
