जबलपुर: हाईकोर्ट ने निलंबन से जुड़े मामले में परिवहन आरक्षक श्वेता अहिरवार को अंतरिम राहत देते हुए निलंबन आदेश के प्रभाव एवं संचालन पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने संबंधित अपीलीय प्राधिकारी को लंबित अपील का चार माह के भीतर निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने उक्त निर्देश जारी किये है।याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अजय शंकर रायजादा व अंजना श्रीवास्तव ने पैरवी की। याचिका में नौ अप्रैल 2026 को जारी निलंबन आदेश को चुनौती देते हुए उसे निरस्त कर पूर्व स्थिति बहाल करने की मांग की गई थी।
साथ ही निलंबन के विरुद्ध प्रस्तुत अपील का कारणयुक्त आदेश से निराकरण किए जाने का अनुरोध किया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9(5), में निलंबन के संबंध में प्रावधान है। निर्धारित अवधि में आरोपों की प्रति एवं संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने तथा अवधि बढ़ाने के लिए सक्षम प्राधिकारी से आदेश प्राप्त नहीं किए जाने के प्रभाव का भी मुद्दा उठाया गया। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के अजय कुमार चौधरी बनाम यूनियन आफ इंडिया के निर्णय का हवाला दिया गया। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि 9 अप्रैल 2026 के निलंबन आदेश का प्रभाव व संचालन चार माह तक अथवा अपील के निर्णय तक, जो पहले हो, स्थगित रहेगा।
