
नई दिल्ली। केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि टेक्सटाइल देश में सर्वाधिक रोजगार सृजन करने वाले उद्योगों में शामिल है। वर्ष 2014 में करीब 138 अरब डॉलर का रहा टेक्सटाइल सेक्टर अब बढ़कर 190 अरब डॉलर का हो गया है। सरकार ने वर्ष 2030 तक इसे 350 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें 250 अरब डॉलर घरेलू बाजार और 100 अरब डॉलर निर्यात से हासिल करने का लक्ष्य है।
सिंह ने गुरुवार को लघु उद्योग भारती की ओर से इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित ‘टेक्सटाइल कॉन्क्लेव’ के उद्घाटन सत्र में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर टैरिफ वार से बने हालात के बीच भारत सरकार ने व्यापार विस्तार के लिए 40 नए देशों की पहचान की है।
उन्होंने बताया कि देश के 548 जिलों से हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट उत्पादों का 132 देशों को निर्यात किया जा रहा है। साथ ही, 7-8 नए प्रकार के फाइबर के घरेलू उत्पादन पर जल्द काम शुरू किया जाएगा, ताकि विदेशों पर निर्भरता कम की जा सके। उन्होंने बांस, अनानास और केले के फाइबर जैसे वैकल्पिक स्रोतों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने पर भी जोर दिया।
टेक्सटाइल एमएसएमई की ओर से सुरक्षा, वैश्विक बाजार तक पहुंच, मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के बेहतर उपयोग, ‘ब्रांड इंडिया’, अनुसंधान और नवाचार के लिए विशेष सहायता की मांग रखी गई। मंत्री ने इन सुझावों में से अधिकांश को स्वीकार करने और एमएसएमई की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया।
MANTRA के निदेशक डॉ. पंकज गांधी ने कहा कि तकनीकी वस्त्रों का इस्तेमाल अब पारंपरिक परिधानों तक सीमित नहीं है। कृषि, स्वास्थ्य, रक्षा, ऑटोमोबाइल, निर्माण, परिवहन और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में इनका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच सहयोग तथा CoE-TRA मॉडल के माध्यम से एमएसएमई को तकनीकी सहायता, परीक्षण, उत्पाद विकास और व्यवसायीकरण की सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
कॉन्क्लेव में टेक्सटाइल सेक्टर में पर्यावरणीय स्थिरता, वेस्ट वॉटर प्रबंधन, एफटीए और एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन पर भी विशेषज्ञों ने जानकारी दी। लघु उद्योग भारती के पदाधिकारियों ने संगठन की तीन दशक की यात्रा तथा उद्योग और उद्यमियों के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
