नयी दिल्ली, 01 अक्टूबर (वार्ता) सरकार ने हवाई अड्डों पर काम करने वाले लोगों और कंपनियों के लिए सिक्योरिटी क्लियरेंस की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए गुरुवार को कई सुधारों की घोषणा की।
नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा ने यहां राजीव गांधी उड़ान भवन में एक संवाददाता सम्मनेलन में बताया कि नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) कारोबार की आसानी के लिए प्रक्रिया को डिजिटल बनाने, हवाई अड्डों पर सिक्योरिटी जोन से बाहर वाणिज्यिक इकाइयों के लिए नियमों को सरल बनाने और सिक्योरिटी क्लियरेंस में लगने वाले समय को कम करने के लिए पहल कर रहा है।
अभी हवाई अड्डों पर नौ अलग-अलग श्रेणियों में अलग-अलग सिक्योरिटी क्लियरेंस दिए जाते हैं। इनमें प्राधिकृत एजेंट, ग्राउंड हैंडलर, कैटरिंग, हवाई अड्डा संचालक, विनियमित एजेंट, ऑक्जिलरी सेवा प्रदाता, खान-पान सेवा से जुड़े लोग, निजी सुरक्षा एजेंट और ईंधन आपूर्ति से संबंधित लोग शामिल हैं। अंक किसी एक श्रेणी में किसी व्यक्ति को जारी सिक्योरिटी क्लियरेंस सभी श्रेणियों के लिए मान्य होगा।
हवाई अड्डे पर काम करने वाले किसी कंपनी के लिए सिक्योरिटी क्लियरेंस अब पांच साल के लिए वैध होगा। सिक्योरिटी क्लियरेंस की प्रक्रिया जारी रहने के दौरान बीच में ठेका समाप्त होने पर भी प्रक्रिया बीच में नहीं रोकी जाएगी। बीसीएएस के हर क्षेत्रीय कार्यालय पर हर मंगलवार को ओपन हाउस में लोग अपनी समस्याएं रख सकेंगे।
हवाई अड्डों पर वाणिज्यिक क्षेत्रों के लिए और वाणिज्यिक क्षेत्रों के आवंटन के लिए अब बीसीएएस की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी, यह सिर्फ सुरक्षा संबंधी कारकों तक सीमित रहेगी।
मंजूर वाणिज्यिक क्षेत्र में गतिविधियों में बदलाव के लिए अब अलग से सिक्योरिटी क्लियरेंस की जरूरत नहीं होगी। ऐसे फैसले जो सुरक्षा से नहीं जुड़े हैं, हवाई अड्डा संचालक ही ले सकेंगे।
श्री सिन्हा ने बताया कि हवाई अड्डे पर प्रवेश के लिए जारी होने वाले परमिट (एईपी) के लिए इसी महीने एक पोर्टल जारी किया जाएगा जिस पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। इससे काफी समय की बचत होगी और जांच तथा क्लियरेंस प्रक्रिया में तेजी आएगी। विभिन्न हवाई अड्डों पर औसतन हर साल 15 लाख एईपी जारी किए जाते हैं।
इस सुधारों के बाद देश के हवाई अड्डों पर कारोबारी गतिविधियों के लिए सिक्योरिटी क्लियरेंस तेज होने की उम्मीद है।
