नई दिल्ली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और ‘वोट चोरी’ के मुद्दों पर विपक्षी दलों के आक्रामक रुख के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी राजनीतिक पलटवार तेज कर दिया है। भाजपा ने स्पष्ट किया है कि यह पूरा विवाद केवल विपक्षी दलों की चुनावी हार के बाद फैलाई गई भ्रामक स्थिति है। पार्टी ने चुनाव आयोग के उस स्पष्टीकरण को अपना मुख्य हथियार बनाया है, जिसमें आयोग ने कहा था कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले सभी चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पार्टी के अन्य नेताओं ने विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक को बिखरे हुए कुनबे और नेतृत्व संकट का प्रतीक करार दिया है।
कांग्रेस की यात्राओं को बताया ‘वंशवाद बचाओ अभियान’, अखिलेश और अन्य दलों की अनुपस्थिति पर साधा निशाना
भाजपा ने विपक्षी दलों की एकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी जिस प्रकार एसआर और अन्य मुद्दों को तूल दे रही है, उसके पीछे असल मकसद गांधी परिवार को राजनीतिक केंद्र में बनाए रखना है। पार्टी ने कर्नाटक और अन्य जगहों पर निकाली जा रही पदयात्राओं को ‘वंशवाद की यात्रा’ करार दिया है। इसके अलावा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई प्रमुख क्षेत्रीय दलों के नेताओं की बैठकों से दूरी बनाने पर कटाक्ष करते हुए भाजपा ने कहा कि विपक्षी गठबंधन में न तो कोई आपसी तालमेल है और न ही राहुल गांधी के नेतृत्व पर सभी दलों की सहमति बन पा रही है।
जनता ने चुनावों में एनडीए को दिया है स्पष्ट बहुमत, संस्थाओं की विश्वसनीयता गिराने की हो रही है साजिश
सत्तारूढ़ पार्टी का कहना है कि हाल ही में संपन्न हुए विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों में जनता ने विपक्ष के इन तमाम मनगढ़ंत आरोपों को खारिज करते हुए एनडीए के पक्ष में अपना जनादेश दिया है। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल अपनी हार तय देखकर संवैधानिक संस्थाओं और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को जानबूझकर ठेस पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं ने इस बात पर जोर दिया है कि एसआर जैसी तकनीकी और पारदर्शी प्रक्रियाओं पर राजनीति करना देश के लोकतांत्रिक ढांचे के साथ खिलवाड़ है, और जनता इस हकीकत को भली-भांति समझती है।

