रीवा: बरसात थमने के बाद शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की सडक़े गढ्डो में तब्दील हो गई हैं. 100 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाली माडल सडक़ में गढ्डे ही गढ्डे है. तेज धूप के साथ अब सडक़ से उठ रही धूल राहगीरों के लिये मुसीबत बन गई है. यहा तत कीसांस लेने में दिक्कत हो रही है. धूल प्रदूषण के चलते राहगीर गुजरने से कतरा रहे है. सबसे ज्यादा स्थित कालेज चौराहा से लेकर रतहरा तक खराब है. सडक़ किनारे और प्रमुख मार्गों पर उडऩे वाली धूल के कारण पार्टिकुलेट मैटर (पीएम10) का स्तर सामान्य सीमा से काफी ऊपर पहुंच गया है.
शहर में पीएम10 का स्तर करीब 200 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक दर्ज किया गया है, जबकि बारिश के बाद धूल बढऩे पर कई स्थानों पर इसका अधिकतम स्तर 250 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से ज्यादा पहुंचने की बात सामने आई है. हवा में इन सूक्ष्म कणों की बढ़ती मात्रा सबसे ज्यादा सडक़ पर चलने वाले लोगों को प्रभावित कर रही है. बाइक सवारों को धूल सीधे झेलनी पड़ रही है, वहीं पैदल चलने वालों और सडक़ किनारे रहने वाले लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है.
शहर के समान तिराहा और सिविल लाइन क्षेत्र के आसपास पीएम 10 का अधिकतम स्तर 246 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक पहुंचा, जबकि सामान्य स्तर 50 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर माना जाता है. हवा में बढ़े पार्टिकुलेट मैटर से आंखों में जलन, गले में खराश और सांस संबंधी परेशानी बढ़ सकती है. खास बात यह है कि कालेज चौराहा मार्ग पर चलना मुश्किल हो रहा है. यही स्थिति काले चौराहा फ्लाईओवर में बनी हुई है.
