सोल, 30 सितंबर (वार्ता) दक्षिण कोरिया ने बुधवार को उत्तर कोरिया से तब माफी मांगने की मांग की, जब असैन्यीकृत क्षेत्र (डीएमजेड) में हुए बारूदी सुरंग धमाके में उसके तीन सैनिक घायल हो गये।
वहीं, उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया की जांच रिपोर्ट को “गढ़ा हुआ” बताकर खारिज कर दिया और चेतावनी दी कि यदि उसके सैनिकों पर गोलीबारी की गयी तो “तत्काल और बेरहम” जवाबी कार्रवाई की जायेगी।
वर्ष 1953 के कोरियाई युद्धविराम समझौते की निगरानी करने वाली अमेरिकी नेतृत्व वाली ‘संयुक्त राष्ट्र कमान’ (यूएनसी) ने इस घटना को युद्धविराम का उल्लंघन करार दिया है। दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त जांच के आधार पर कमान ने बताया कि सैन्य सीमांकन रेखा (एमडीएल) के दक्षिण में उत्तर कोरिया की एक और सक्रिय बारूदी सुरंग मिली है।
‘योनहाप’ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, “जांच के निष्कर्षों के आधार पर कमान ने पाया कि युद्धविराम समझौते का उल्लंघन हुआ है। कमान स्थापित युद्धविराम तंत्र के माध्यम से इस उल्लंघन का समाधान कर रही है।”
गत 21 सितंबर को यह विस्फोट दोनों कोरियाई देशों को अलग करने वाले भारी किलेबंदी वाले असैन्यीकृत क्षेत्र के दक्षिण कोरियाई हिस्से में एक सैन्य खोज अभियान के दौरान हुआ था। इस हादसे में तीन दक्षिण कोरियाई सैनिक घायल हो गये थे, जिनमें से दो की हालत गंभीर है।
कमान के अनुसार, यह विस्फोट सैन्य सीमांकन रेखा से लगभग 10 मीटर दक्षिण में हुआ। दक्षिण कोरिया ने बताया कि उसके सैनिक उस क्षेत्र की तलाशी ले रहे थे, जहां उत्तर कोरिया के बारूदी सुरंग बिछाये जाने का संदेह था, तभी एक मिनट के भीतर दो धमाके हुए।
दक्षिण कोरियाई सेना ने कहा कि उसकी जांच में इस बात की प्रबल संभावना सामने आयी है कि ये बारूदी सुरंगें उत्तर कोरिया ने अपने चल रहे सीमा किलाबंदी कार्य के हिस्से के रूप में बिछायी थीं। दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया से माफ़ी मांगने और सीमा पर बारूदी सुरंग बिछाने व अन्य निर्माण कार्य तुरंत रोकने का आह्वान किया है।
दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (जेसीएस) ने कहा कि जांच में पाया गया कि धमाका उत्तर कोरियाई बारूदी सुरंग के कारण होने की “पूरी संभावना” है। सेना ने बताया कि ये बारूदी सुरंगे सीमा को मजबूत करने के उत्तर कोरिया के प्रयासों से जुड़ी हो सकती हैं।
उत्तर कोरिया ने इन निष्कर्षों को खारिज कर दिया। सर्वोच्च नेता किम जोन्ग उन की प्रभावशाली बहन किम यो-जोन्ग ने दक्षिण कोरिया की जांच को “खुद ही रचा गया नाटक” करार दिया और दक्षिण कोरिया पर तनाव बढ़ाने के लिए सबूत गढ़ने का आरोप लगाया।
कोरियाई सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) के जारी बयान में सुश्री किम ने कहा, “इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए कि दक्षिण कोरिया के सशस्त्र उपद्रवी अब बेबुनियाद परिणाम गढ़ रहे हैं और उत्तर कोरिया के खिलाफ राजनीतिक व सैन्य उकसावे के लिए अपने आचरण को सही ठहरा रहे हैं, तथा ‘उचित और तर्कसंगत कदम उठाने’ की बात कर रहे हैं।”
सुश्री किम ने कहा, “हमारे सैनिकों ने एक बार भी सीमा पार नहीं की है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दक्षिण कोरियाई सैनिकों ने उत्तर कोरियाई सैनिकों पर सीधे गोलीबारी की, तो सीमावर्ती इकाइयां “तत्काल और बेरहम जवाबी कार्रवाई” करेंगी। उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि सीमा निर्माण कार्य के दौरान उत्तर कोरियाई सैनिकों ने सैन्य सीमांकन रेखा पार की थी। उन्होंने इस कार्य को “सैन्य उद्देश्य से परे अपनी संप्रभुता का पूर्ण प्रयोग” बताया।
माना जा रहा है कि विस्फोट स्थल पर उत्तर कोरिया की कम से कम चार बारूदी सुरंग रखी गयी थीं, जिनमें से दो में विस्फोट हुआ था। मंगलवार को मौके का निरीक्षण करने के बाद जेसीएस ने बताया कि उसे विस्फोट स्थल के पास एक और उत्तर कोरियाई लैंडमाइन मिली है।
‘योनहाप’ की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा मंत्री कांग शिन-चुल ने सांसदों को बताया कि यह माइन्स किसी दुर्घटना या भूल से छूटने के बजाय जानबूझकर बिछायी गयी लगती है और यह उत्तरी कोरिया के सीमा किलाबंदी के प्रयासों से जुड़ी हो सकती है।
श्री कांग ने कहा कि ऐसा लगता है कि उत्तरी कोरिया ने सैन्य सीमांकन रेखा के दक्षिण में “कई स्थानों” पर माइन्स बिछायी हैं। उन्होंने इसे युद्धविराम समझौते का स्पष्ट उल्लंघन करार देते हुए कहा कि दक्षिण कोरिया चरणबद्ध तरीके से “उचित कदम” उठायेगा।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया को एक दुश्मन देश घोषित करने के बाद एकीकरण की अपनी पुरानी नीति को त्याग दिया है और बैरियर बनाने, सड़कें ढालने व बारूदी सुरंग बिछाने जैसे सीमा किलाबंदी का काम तेजी से आगे बढ़ा रहा है। दूसरी ओर, दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग उत्तर कोरिया से बातचीत फिर शुरू करने और सैन्य तनाव कम करने का प्रयास कर रहे हैं। श्री ली ने पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि दक्षिण कोरिया कोरियाई प्रायद्वीप में शांति के लिए “पेसमेकर” के रूप में काम करेगा।
