भोपाल के मास्टर प्लान-2047 को लेकर आपत्तियों और सुझावों का सिलसिला शुरू हो गया है। दो दिनों में टीएंडसीपी के पोर्टल और ईमेल पर 174 आपत्तियां दर्ज हुई हैं, जबकि कलेक्टर कार्यालय में भी 5 शिकायतें पहुंची हैं। सबसे ज्यादा आपत्तियां प्रस्तावित सड़कों को लेकर सामने आ रही हैं। किसानों का कहना है कि मास्टर प्लान में उनके खेतों और जमीनों से सड़कें प्रस्तावित की गई हैं। कई जगह सड़क की चौड़ाई अधिक होने पर भी आपत्ति जताई गई है।
वहीं, नीलबड़ तालाब के जलग्रहण क्षेत्र को लेकर भी चिंता सामने आई है। करीब 4.37 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले नीलबड़ तालाब के कैचमेंट में करीब 85 हजार निर्माण का दबाव बताया गया है। मास्टर प्लान में 43.85 प्रतिशत जमीन आवासीय उपयोग, 27.01 प्रतिशत हरित क्षेत्र और 9.53 प्रतिशत जमीन परिवहन के लिए प्रस्तावित है। बढ़ते निर्माण के बीच सवाल है कि तालाब तक बारिश का पानी पहुंचाने वाले प्राकृतिक जल प्रवाह और कैचमेंट कितने सुरक्षित रहेंगे।
पर्यावरणविद् राशिद नूर खान ने जलग्रहण क्षेत्र और प्राकृतिक जल प्रवाह को सुरक्षित रखने की जरूरत बताई है। विशेषज्ञ प्लानर प्रभाष जेटली ने हरित क्षेत्र को कम से कम 35 प्रतिशत करने और कैचमेंट में निर्माण निषेध क्षेत्र तय करने की बात कही। CREDAI भोपाल के मनोज मीक ने विकास के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को जरूरी बताया, जबकि पर्यावरणविद् सुभाष सी पांडे ने मौजूदा ग्रीन बेल्ट के संरक्षण पर सवाल उठाए हैं।
मास्टर प्लान पर आपत्तियां और सुझाव 30 अक्टूबर तक लिए जाएंगे। इसके बाद प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर विचार कर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
