नयी दिल्ली, 30 सितंबर (वार्ता) ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स फेडरेशन (एआईसीपीडीएफ) और ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (एआईएमआरए) ने 02 अक्टूबर को प्रस्तावित “नो यूपीआई डे” का आह्वान वापस ले लिया है। दोनों संगठनों ने केंद्र सरकार द्वारा आगामी 15 अक्टूबर से यूपीआई के माध्यम से दो हजार रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर शुल्क लगाने के विरोध में अपने सदस्यों से “नो यूपीआई डे” का आह्वान किया था। उसने अपने सदस्यों से कहा था कि वे 02 अक्टूबर को यूपीआई में कोई भुगतान स्वीकार न करें। उल्लेखनीय है कि सरकार ने 15 अक्टूबर से दो हजार रुपये से ऊपर के यूपीआई मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने की घोषणा की है।
अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री और भाजपा सांसद प्रवीन खंडेलवाल के नेतृत्व में देश के विभिन्न राज्यों के लगभग 20 वरिष्ठ व्यापारिक नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के बाद “नो यूपीआई डे” का आह्वान वापस लेने का फैसला किया। श्री खंडेलवाल ने बताया कि बैठक में वित्त मंत्री को व्यापारियों की चिंताओं से अवगत कराया गया। प्रतिनिधिमंडल में कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया, एआईसीपीडीएफ के अध्यक्ष धैर्यशील पाटिल, एआईएमआरए के अध्यक्ष कैलाश लाखयानी तथा ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के अध्यक्ष पंकज अरोड़ा भी शामिल थे।
भाजपा सांसद ने बताया कि वित्त मंत्री के साथ हुई सकारात्मक एवं रचनात्मक चर्चा तथा व्यापारिक संगठनों द्वारा उठायी गयी चिंताओं पर समुचित विचार किये जाने के आश्वासन के बाद व्यापारियों ने “नो यूपीआई डे” का आह्वान वापस लिया है। प्रतिनिधिमंडल ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार और व्यापारिक संगठनों के बीच निरंतर संवाद के माध्यम से एक व्यावहारिक और टिकाऊ समाधान निकलेगा। इससे पहले कैट ने “नो यूपीआई डे” के आह्वान की खबरों का खंडन करते हुए कहा था कि उसने इस तरह का कोई आह्वान नहीं किया है। उसने कहा था कि कुछ व्यापारिक संगठनों और क्षेत्रीय इकाइयों ने अपने स्तर पर ऐसा आह्वान किया है तो यह उनका अपना फैसला है और कैट से उसका कोई लेना-देना नहीं है।

