
सिंगरौली । जिले में विकास के दावों और सरकारी योजनाओं की चमक के बीच माड़ा क्षेत्र स्थित आदिवासी छात्रावास की बदहाल तस्वीर उन दावों को आईना दिखाती नजर आ रही है।
छात्रावास में करीब 50 विद्यार्थी रहकर पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन भवन की जर्जर स्थिति और मूलभूत सुविधाओं की कमी उनकी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। विद्यार्थियों के लिए खराब बाथरूम, पेयजल कूलर में करंट के संभावित खतरे और बिजली गुल होने पर वैकल्पिक व्यवस्था का अभाव सामने आने की बात कही जा रही है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि जिन विद्यार्थियों के लिए सरकार सुरक्षित वातावरण और बेहतर शिक्षा व्यवस्था का दावा करती है, उन्हें जर्जर भवन में रहने की नौबत क्यों बनी हुई है। छात्रावास के समीप ही तहसीलदार और एसडीएम कार्यालय स्थित हैं। बावजूद इसके भवन की स्थिति और मूलभूत सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं होना प्रशासनिक निगरानी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
वाटर कूलर एवं बाथरूम भी बदहाल
बताया जा रहा है कि छात्रावास में आदिवासी एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थी रहते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। भवन की तकनीकी जांच, विद्युत सुरक्षा परीक्षण, पेयजल कूलर की जांच और बाथरूम की स्थिति का तत्काल निरीक्षण कराया जाना जरूरी है। इधर स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के बीच बड़ा सवाल यही है कि व्यवस्था किसी हादसे के बाद जागेगी या उससे पहले। शासन-प्रशासन यदि विकास और सुरक्षित शिक्षा व्यवस्था के दावे करता है तो छात्रावास की जमीनी स्थिति उन दावों की वास्तविक परीक्षा भी है। करीब 50 बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस मामले में तत्काल निरीक्षण, मरम्मत और आवश्यक सुरक्षा इंतजाम कराना जरूरी है।
