मुंबई, सूरत की एक कोर्ट ने ब्राह्मण समाज पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में जाने-माने फिल्म डायरेक्टर अनुराग कश्यप के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है।
कानूनी गलियारों में इन दिनों फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े मामलों पर चर्चाएं तेज हैं। कई बार ऐसा होता है कि जब किसी स्टार को कोर्ट द्वारा तलब किया जाता है, तो पेश न होने पर न्याय प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कड़े कदम उठाने पड़ते हैं। ताजा मामला बॉलीवुड के फेमस फिल्ममेकर अनुराग कश्यप से जुड़ा है, जिन्हें लेकर सूरत की कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करना पड़ा भारी
सूरत कोर्ट ने साफ किया कि कई बार समन भेजने और नोटिस जारी करने के बाद भी डायरेक्टर सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए। न्यायिक प्रक्रिया का लगातार पालन न करने की स्थिति में कोर्ट के पास वारंट जारी करने का अधिकार होता है। इस मामले में भी तारीखों पर हाजिर न होना आरोपी के लिए भारी साबित हुआ है।
सोशल मीडिया पर दिए बयानों से जुड़ा विवाद
यह पूरा विवाद पिछले साल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर शेयर किए गए कुछ बयानों की वजह से शुरू हुआ था। सोशल मीडिया पर कही गई बातें कई बार इतनी संवेदनशील हो जाती हैं कि मामला सीधे कोर्ट तक पहुंच जाता है।
इस प्रकरण में भी कुछ बयानों को लेकर समाज विशेष की ओर से कड़ी आपत्ति जताई गई थी, जिसके बाद निर्देशक के खिलाफ कानूनी शिकायत दर्ज कराई गई थी।
सुनवाई की प्रक्रिया में लगातार आ रही रुकावट
किसी भी आपराधिक या मानहानि से जुड़े मामले की निष्पक्ष जांच के लिए दोनों पक्षों का कोर्ट के सामने हाजिर होना जरूरी होता है। शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार शुरुआती चरण की कानूनी कार्यवाही और सत्यापन के दौरान भी उचित सहयोग नहीं मिल पा रहा था। बार-बार समन भेजने पर भी पेशी टालने के रवैये ने कोर्ट को यह कड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है।
अगली सुनवाई पर टिकी है सबकी नजरें
सूरत कोर्ट द्वारा जमानती वारंट जारी किए जाने के बाद अब इस मामले की गर्माहट और अधिक बढ़ गई है। क्या आने वाली तारीख पर अनुराग कश्यप कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखने जाएंगे या कानूनी मुश्किलें और अधिक गहरी होंगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
हाल ही में डायरेक्टर अनुराग कश्यप ने दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज विवाद पर बेहद सख्त और अनोखा रिएक्शन दिया था। अनुराग कश्यप इस तरह के डिजिटल प्रतिबंधों को बेअसर बताते हुए दर्शकों को एक अलग ही रास्ता सुझाव दिया है। उनका कहना है कि अगर कोई प्लेटफॉर्म आधिकारिक तौर पर फिल्म को दिखाने से पीछे हट रहा है, तो लोगों को इसके पायरेटेड वर्जन का सहारा लेना चाहिए।
