सिंगरौली :वर्ष 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती की कैबिनेट बैठक से विकास की जगी उम्मीद दो दशक बाद भी अधूरी है। लिंक कोर्ट बंद होने से किसानों को 60 किलोमीटर तक तहसील की दौड़ लगानी पड़ रही है। वहीं तहसील भवन निर्माणाधीन है और 2005 से गोपद सिचाई उद्वहन योजना ठप है।
यहां बताते ले कि वर्ष 2004 के फरवरी महीने में देवसर तहसील क्षेत्र के महुआगांव में तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती के द्वारा कैबिनेट की बैठक बुलाई गई थी। महुआगांव में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक से लोगों को विश्वास था कि अब महुआगांव की तकदीर बदलेगी और विकास की नई तस्वीर सामने आएगी। दो दशक से अधिक समय गुजरने के बाद भी कई उम्मीदें अधूरी हैं। बिजली, सड़क और नालियों जैसी मूलभूत सुविधाएं जरूर पहुंचीं, लेकिन प्रशासनिक सुविधाओं और सिंचाई व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाएं आज भी सवालों के घेरे में हैं। महुआगांव में लंबे समय से लिंक कोर्ट बंद पड़ा है।
ग्रामीणों के अनुसार पूर्व में नायब तहसीलदार डीके सिंह और अमित मिश्रा के कार्यकाल में सप्ताह में दो दिन नियमित रूप से लिंक कोर्ट लगती थी। इससे आसपास के किसानों को राजस्व मामलों की पेशी और अन्य कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ता था। किसान खेती-किसानी के जरूरी काम निपटाकर निर्धारित दिन स्थानीय स्तर पर ही राजस्व संबंधी मामलों में उपस्थित हो जाते थे। इससे उनका समय, श्रम और आने-जाने का खर्च बचता था। लिंक कोर्ट बंद होने के बाद किसानों को राजस्व संबंधी कार्यों के लिए सरई तहसील कार्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है। फिलहाल 22 साल पूर्व कैबिनेट की बैठक महुआगांव में आयोजित कर ग्रामीण विकास पर ध्यान देने और विकास मुख्यधारा से जोड़ने का सरकार का मकसद था। परंतु समय बितता गया, चार मुख्यमंत्री बदले, परंतु गांव की तस्वीर में ज्यादा बदलाव नही हुआ। बहरहाल अब लोग मान रहे हैं कि कैबिनेट की बैठक का कोई सार्थक परिणाम नही दिखा और न ही ज्यादा उम्मीदे हैं।
दो दशक से गोपद उद्वहन सिचाई योजना ठप
ग्रामीणों के मुताबिक कई लोगों को 50 से 60 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ती है। सुबह घर से निकलने के बाद तहसील की प्रक्रिया पूरी करने में पूरा दिन बीत जाता है। इससे खेती-किसानी के जरूरी काम प्रभावित होने के साथ समय और आर्थिक बोझ भी बढ़ गया है। इधर, महुआगांव में तहसील भवन का निर्माण भी अधूरा पड़ा है। लंबे समय से निर्माण कार्य बंद होने के कारण भवन कब तक पूरा होगा, इसे लेकर ग्रामीणों में असमंजस है। निर्माण कार्य रुकने का कारण भी स्पष्ट नहीं हो सका है। महुआगांव के विकास से जुड़ी एक और बड़ी उम्मीद गोपद उद्वहन सिंचाई योजना से थी। करवाही गांव के समीप गोपद नदी से शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य महुआगांव, निगरी, पापल, करवाही, भरसेड़ी सहित आधा दर्जन से अधिक गांवों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाना था। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2005 से यह योजना बंद पड़ी है। योजना के बंद होने से किसानों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका।
