छह महीने में पंद्रह हजार से अधिक कुत्तों की हुई नसबंदी

जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट सरकार द्वारा प्रदेश में आवारा कुत्तों की समस्या और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में दर्ज स्वत: संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को निर्धारित की है। हाईकोर्ट में समीक्षा के बाद सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट भेजी जाएगी। दरअसलस आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त 2025 और 7 नवंबर 2025 को कई निर्देश जारी किए थे।

इसके बाद 19 मई 2026 को शीर्ष अदालत ने देश के सभी हाईकोर्ट को इस विषय पर स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसी निर्देश के परिप्रेक्ष्य में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज की और राज्य सरकार से आवारा कुत्तों की रोकथाम, नसबंदी, टीकाकरण तथा सार्वजनिक परिसरों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का विवरण मांगा था। मामले की सुनवाई दौरान राज्य के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल की ओर से हाईकोर्ट में प्रस्तुत जवाब में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी दी गई है।

सरकार के अनुसार पिछले छह महीनों में प्रदेश में 15 हजार से अधिक आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया गया है। जवाब में सार्वजनिक परिसरों को आवारा कुत्तों से मुक्त रखने और नियमित निगरानी के लिए किए गए उपायों का भी उल्लेख है। इसके अलावा बताया गया कि खाद्य सामग्री बेचने वाले वेंडरों को कचरे के उचित निपटान के लिए जागरूक किया जा रहा है। उन्हें खाद्य अपशिष्ट बंद डस्टबिन में रखने और खान-पान के स्टॉल के आसपास आवारा कुत्तों को भोजन न कराने की सलाह दी जा रही है। सरकार का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य सार्वजनिक स्थलों पर आवारा कुत्तों की मौजूदगी को नियंत्रित करना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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