
मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास
मिशन 2028 में जुटी भाजपा ने निमाड़ की 2 आदिवासी विधानसभा सीटों पर विशेष फोकस किया है. खरगोन जिले की भीकनगांव और बड़वानी जिले की राजपुर सीट ऐसी हैं, जिस पर वर्षों से कांग्रेस का कब्जा है. कांग्रेस की झूमा सोलंकी 2013 से लगातार इस सीट पर जीत दर्ज करती आ रही हैं. हालांकि यहां कांग्रेस-भाजपा के बीच मुकाबला 2018 को छोड़ कड़ी टक्कर का रहा. 2023 में झूमा ने हैट्रिक तो लगा ली, मगर उनके खाते में जीत मामूली 603 वोटों से आई. सो भाजपा 2028 के चुनाव में कांग्रेस को बेदखल करने के लिए बढ़त बनाने की रणनीति पर अभी से लगी हुई है. इसी तरह राजपुर विधान सभा सीट जीत के मामले में दिग्विजय सरकार में मंत्री व कमलनाथ सरकार में गृहमंत्री रहे बाला बच्चन के नाम से जानी जाती है. 1993 में कांग्रेस से बाला बच्चन पहली बार इस सीट से चुनाव लड़े और भाजपा को हराकर अपना विधायकी खाता खोला. 1998 में उन्होंने विधायकी बरकरार रखी, लेकिन 2003 में भाजपा के सामने पराजय झेलनी पड़ी. 2008 में यहां उन्हें टिकट नहीं मिला, पर 2013 में उन्होंने वापसी के साथ 2023 में जीत की हैट्रिक लगाई. यहां भी कांग्रेस का भीकनगांव जैसा हाल रहा, जीत मिलती रही, लेकिन वोटों के अंतर में गिरावट दिखती रही. 2018 में 932 तो 2023 में वे 890 के मामूली अंतर से जीत पाए. दो बार से जीत के नजदीक आकर फिसल जाने वाली इन दोनों सीटों पर अब भाजपा ने 2028 के चुनाव में खुद को मजबूत बनाने के लिए माइक्रो-प्लानिंग रणनीति बनाई है. पार्टी का लक्ष्य प्रत्येक बूथ पर 51 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करना है. इसके लिए पन्ना प्रमुखों को सक्रिय कर घर-घर संपर्क अभियान चलाया जा रहा है. आदिवासी बहुल्य इन सीटों पर प्रभावी जाति समूहों को साधने के लिए नजदीकी विधायकों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने का निर्देश दिया गया है.
पानसेमल विधायक बर्डे को जिम्मा
राजपुर सीट पर भाजपा की विजय का परचम फहराने का जिम्मा भाजपा ने अघोषित रूप से फिलहाल पानसेमल विधायक श्याम बर्डे को दिया है.उल्लेखनीय है कि पानसेमल पूर्व में राजपुर विधान सभा का ही हिस्सा था. परिसीमन में अलग हो 2008 में यह अस्तित्व में आई और इसके पहले विधायक बाला बच्चन ही निर्वाचित हुए थे. 2023 में श्याम बर्डे ने निर्वाचित हो भाजपा को पहली बार यह सीट दिलाई. बर्डे जमीनी नेता हैं और क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ है. इसी का फायदा राजपुर में भाजपा को मिल रहा है. वे भाजपा का जनाधार तो बढ़ा ही रहे हैं, साथ ही कांग्रेस को कमजोर करने की कड़ी में क्षेत्र में सेंध लगाकर अब तक सैंकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं व विचारधारीयों को भाजपा से जोड़ चुके हैं.
मछुआरों के सामने पाबंदियां और रोजगार संकट
ओंकारेश्वर में प्रशासनिक पाबंदियों का खामियाजा मछुआरों को भुगतना पड़ रहा है. उनका रोजगार प्रभावित होने से रोजी-रोटी का संकट हमेशा बना रहता है. मानसूनी दौर, मत्सय प्रजनन काल में मत्सयाखेट पर शासन का प्रतिबंध रहता है, ऐसी दशा में मछुआरे पर्यटकों से मिलने वाली आय पर निर्भर रहते हैं. वे नावों से इस पार से उस पार पर्यटकों, श्रद्धालुओं को ले जाकर, ओंकार पर्वत परिक्रमा कराकर आय अर्जित करते हैं. समस्या तब आती है जब सुरक्षा के बहाने नावों पर भी पाबंदी लगा दी जाती है. इन सबसे तो वे जूझ ही रहे थे, अब कुछ समय से नई समस्या पैदा हो गई है. यहां जल क्षेत्र पर लगाए गए सोलर सिस्टम ने उनके नौकायन को बाधित कर दिया है, जिससे उनकी पर्यटकों से आय भी प्रभावित हो रही है. इसी सिलसिले में राज्यसभा सांसद महेश केवट के विगत दिनों ओंकारेश्वर पहुंचने पर मांझी-कहार-केवट समाज ने उनके समक्ष जलाशय के बैकवॉटर में सोलर पैनल लगने से मछुआरों का रोजगार प्रभावित होने का मुद्दा उठाया और विस्थापन, आर्थिक सहायता और वैकल्पिक रोजगार की मांग रखी. सांसद केवट ने उन्हें आश्वासन तो दिया है कि वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलकर मछुआरों की समस्याओं पर चर्चा कर समाधान का प्रयास करेंगे, पर क्या हल निकलता है ,आगे देखते हैं .
भाजपा का झूमा और बाला की सीटों पर विशेष फोकस … में झूमा सोलंकी, बाला बच्चन
– पानसेमल विधायक बर्डे को जिम्मा … में श्याम बर्डे
