
बालाघाट,विकास के दावों के बीच बालाघाट जिले की लामता तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत सकरी का तिनगड़ी सेमरटोला आज भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए जूझ रहा है। यहां करीब 5 से 7 परिवार बरसात में कीचड़ से भरे रास्ते पर चलने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए वे पिछले करीब 10 वर्षों से आवेदन और गुहार लगा रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
बरसात शुरू होते ही तिनगड़ी सेमरटोला का रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है। हालत यह है कि ग्रामीणों के लिए खेत, गांव, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक सड़क की खराब स्थिति का सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ता है, जो तिनगड़ी से करीब 2 किलोमीटर दूर खेतों में मकान बनाकर रह रहे हैं।
बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा असर
ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क के कारण बच्चों को स्कूल आने-जाने में भारी परेशानी होती है। कई बार बरसात के दौरान बच्चे दो से तीन माह तक पढ़ाई से दूर रह जाते हैं। वहीं बीमारी या आपात स्थिति में मरीज को स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचाना भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।
किसानों के लिए भी रोज की परेशानी
यह रास्ता केवल ग्रामीणों के आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि किसानों के खेतों तक पहुंचने का प्रमुख रास्ता भी है। ग्रामीण इसी मार्ग से अपने खेतों तक आते-जाते हैं और मवेशियों को भी लेकर जाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार वन विभाग की लकड़ी और बांस की निकासी के लिए भी इस मार्ग का उपयोग होता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बन जाने से किसानों, बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मवेशियों के आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी। इसके बावजूद वर्षों से सड़क निर्माण की मांग पूरी नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
सरपंच बोले—कार्ययोजना में शामिल है सड़क
ग्राम पंचायत सकरी के सरपंच सोनेलाल मसराम ने माना कि बरसात के दौरान इस मार्ग से ग्रामीणों और आदिवासी किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि सड़क को पंचायत की कार्ययोजना में शामिल किया गया है।
सरपंच के अनुसार सड़क की लंबाई अधिक होने के कारण पंचायत स्तर से निर्माण कराना संभव नहीं है। सड़क निर्माण के लिए संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा विधायक, सांसद और मंत्री को भी आवेदन एवं निवेदन किया गया है।
सवाल वही—10 साल बाद भी सड़क कब?
ग्रामीणों की समस्या सिर्फ एक कच्चे रास्ते की नहीं, बल्कि स्कूल, स्वास्थ्य, खेती और रोजमर्रा के आवागमन से जुड़ी है। वर्षों से आवेदन देने के बावजूद यदि बरसात में ग्रामीणों को आज भी कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर तिनगड़ी सेमरटोला की सड़क कब बनेगी?
