कांग्रेस के बदले तेवर, मुद्दों में हुई आक्रामक

विंध्य की डायरी

 

डा. रवि तिवारी

 

विंध्य क्षेत्र में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने और संगठन को मजबूत करने के लिये कांग्रेस पार्टी लगातार प्रयास कर रही है. क्षेत्र में जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करने के लिये विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं . पार्टी अपने संगठन को जमीनी स्तर पर पुनर्जीवित करने और पकड़ मजबूत करने के लिये प्रयास कर रही है. ब्लाक से लेकर पंचायत स्तर पर कमेटियां बनाई जा रही है ताकि जनता से सीधे संवाद हो सके. पार्टी अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिये संगठन को सक्रिय करने में जुटी हुई है. विंध्य में कांग्रेस के तेवर बदले हुए हैं और मुद्दों को लेकर आक्रामक है. जिस तरह से रीवा की बिगड़ी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन रहा. उससे माना जा सकता है कि पार्टी के कामकाज में अभूतपूर्व बदलाव है. क्षेत्रीय दिग्गज नेताओं को कार्यकर्ताओं के साथ एक मंच पर लाने का भी प्रयास जारी है. जनता से जुड़े हर मुद्दों को लेकर आक्रामक रणनीति देखने को मिल रही है. फिर चाहे बेरोजगारी हो या किसानों की समस्या, पार्टी का मानना है कि प्रदेश की सत्ता का रास्ता विंध्य से ही गुजरता है. शायद यही वजह है कि पार्टी इस क्षेत्र में पूरी ताकत झोंकने में लगी है. 2023 के चुनाव में केवल पांच सीट पर ही पार्टी को संतोष करना पड़ा था. इस बार उम्मीद के साथ पार्टी का संघर्ष जारी है. वर्ष 2003 से पहले विंध्य अंचल को कांग्रेस का बेहद मजबूत गढ़ माना जाता था. लेकिन उसके बाद परिस्थितियां बदली और कांग्रेस वनवास में पहुंच गई. आगामी निकाय एवं वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी अभी से रणनीति तैयार कर रही है ताकि विंध्य क्षेत्र में अपनी स्थिति को पूरी तरह सुधारा जा सके. प्रदेश स्तर के नेताओं की नजर विंध्य पर टिकी हुई है. प्रशिक्षण के साथ कार्यकर्ताओं को सीधे जिम्मेदारी दी जा रही है. कुल मिलाकर कांग्रेस की सक्रियता मिशन 2028 को लेकर जमीनी स्तर पर देखने को मिल रही है.

सतना के मुंह पर एक और तमाचा

दो दशक बाद प्रदेश की सडक़ों पर मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना की बसें दौड़ेगी. पूरे तामझाम के साथ शुभारंभ भी हो चुका है. इस बीच सतना के मुंह पर एक और तमाचा लगा है. दरअसल सतना से पहले इलेक्ट्रिक बसें छीन ली गई थीं और अब मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना से भी सतना का पत्ता साफ हो गया है. रीवा-कटनी को सेंटर बनाया गया है. परिवहन सेवा के नाम पर सतना को दूसरा बड़ा झटका है. पहला झटका 21 मई को तब लगा था जब सतना का नाम पीएम ई-बस सेवा से काट दिया गया था. इसके साथ ही सतना को मिलने वाली इलेक्ट्रिक बसे छीन ली गई और अब मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना का झुनझुना बस स्टाप के रूप में थमा दिया गया. मतलब जो भी बसें रूट पर जाएगीं उसमें सतना महज एक बस स्टाप होगा. बसें यहां सवारी उतारेगी और चढ़ाएंगी. सवाल यह उठता है कि हर बार सतना की उपेक्षा क्यों होती है? कहीं न कहीं जनप्रतिनिधियों की सत्ता में पकड़ और कमजोर नेतृत्व है, जिसके चलते सतना लगातार उपेक्षित हो रहा है. फिर चाहे एयरपोर्ट के मामले में हो या बसों के संचालन में, सतना का नाम हर बार कट जाता है. इस पर जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को सोचना होगा. स्थानीय जनता का भी आक्रोश पनप रहा है.

बारिश के चलते कार्यक्रम निरस्त

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल विंध्य के दो दिवसीय दौरे पर आने वाले थे. लेकिन यहां लगातार हो रही झमाझम बारिश के चलते दौरा निरस्त करना पड़ा. प्रदेश अध्यक्ष को मैहर, सतना होते हुए रीवा-मऊगंज पहुंचकर सेवा कार्यो में सहभागिता करने के साथ संगठनात्मक बैठक लेनी थी. इसके साथ ही प्रबुद्धजनों एवं व्यापारियों के साथ संवाद स्थापित कर रीवा शहर में रोड शो भी प्रस्तावित था. बारिश ने प्रदेश अध्यक्ष के कार्यक्रम को रोक दिया. भारी बारिश के अलर्ट के चलते दौरा आखिरकार निरस्त करना पड़ा. हालाकि बारिश थमने के बाद जल्द ही विंध्य के दौरे पर प्रदेश अध्यक्ष आएंगे. एक तरह से यह संगठनात्मक दौरा रहेगा, प्रदेश अध्यक्ष संगठन की नब्ज टटोलने के साथ स्थानीय स्तर पर संगठन को और मजबूत बनाने का मंत्र भी देंगे.

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