सतना:प्रदेश के पूर्व कृषि मंत्री गोपालशरण सिंह के भतीजे होने के नाते नागौद क्षेत्र की किले की राजनीति में सेंध लगा गढ़ी की राजनीति को नया आयाम देने वाले तीन बार के विधायक रामप्रताप सिंह ने तीन दशक पहले विन्ध्य की प्यासी धरती में नर्मदा जल लाने का संकल्प लिया था.उनका यह विचित्र संयोग ही रहा अब जब नर्मदा का पानी विन्ध्य की धरती को छूने वाला है भगवान राम ने आचमन पहले ही उनकी सांसे हमेशा-हमेशा के लिए छीन ली.
स्वच्छ छवि और राजनीति में सुचिता के जीवन भर पक्षधर रहे श्री सिंह ने राजपरिवार से नाता होने केे बाद भी अपने आप को गढ़ी की व्यवस्था से कोसों दूर रखा.अनुशासन प्रिय अपनी बात मनवाने के लिए अन्त तक प्रयत्नशील रहने वाले विधायकजी ही पूरी विधानसभा में एक मात्र ऐसे सदस्य थे जिन्होने जनप्रतिनिधियों का वेतन-भत्ता बढ़ाए जाने का खुलकर विरोध किया था.आज भी विधानसभा की कार्यवाही में उनका यह विरोध दर्ज है.उनका मानना था कि जनप्रतिनिधियों को कभी सुविधाभोगी नहीं होना चाहिए.जनता जिस स्थिति में रहती है.
उसे भी उसी स्थिति में रहना चाहिए.उसकी जरूरतों को पूरा करने का जिम्मा जनता का है,जो जरूरी होगा वह स्ंवय उपलब्ध कराएगी.श्री सिंह ऐसे विधायक थे जिन्हे जब आश्वासन के बाद पाट्री ने मौका नहीं दिया तो उन्होने निर्दलीय तौर पर चुनाव जीतकर लोगों के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया.इतना ही नहीं नर्मदा दांयी तट नहर की गुम हो चुकी फाइल को दिल्ली में नर्मदा जल बोर्ड के कार्यालय में जाकर खोजवाने का काम भी किया.श्री सिंह ने नर्मदा जल के मामले में जो संकल्प लिया उसे सारे जीवन कायम रखा.उन्होने अपना राजनैतिक उत्तराधिकारी अपने पुत्र गंगनेन्द्र प्रताप सिंह संजू को ही बनाया है.जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष श्री सिंह वर्तमान भारतीय जनता पार्टी सक्रिय सदस्य है.
