नई दिल्ली, यूरोपीय संघ के ‘कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म’ (CBAM) के तहत अत्यधिक प्रदूषण वाले सामानों पर भारी पर्यावरण टैक्स लगाया जा रहा है, जिससे भारत के स्टील, सीमेंट और एल्युमिनियम जैसे प्रमुख उद्योगों पर बड़ा आर्थिक संकट मंडरा रहा है।
घरेलू कार्बन मार्केट की आवश्यकता
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और आईआईएम अहमदाबाद की संयुक्त रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि विदेशी कर के भारी बोझ से बचने के लिए भारत को तुरंत एक पारदर्शी और मजबूत घरेलू कार्बन-प्राइसिंग ढांचा तैयार करना चाहिए।
विकास और संतुलन की रणनीति
रिपोर्ट में यह भी सलाह दी गई है कि शुरुआती चरण में कड़े प्रतिबंध लगाने के बजाय औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच बेहतर संतुलन बनाते हुए कार्बन उत्सर्जन को धीरे-धीरे कम किया जाना चाहिए।

