
सतना : जिले की सबसे बड़ी कृषि उपज मंडी में सोमवार को खरीदी व्यवस्था ठप रहने से दूर-दराज से उपज लेकर पहुंचे सैकड़ों किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बैंक हड़ताल का हवाला देकर मंडी में खरीदी नहीं की गई, जबकि बैंक कर्मचारियों की हड़ताल रविवार शाम को ही समाप्त हो चुकी थी। खरीदी नहीं होने के कारण कई किसानों को अपनी उपज वापस लेकर लौटना पड़ा, जिससे उन्हें परिवहन का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा।
गेट खुला, लेकिन खरीदी व्यवस्था रही बंद
सोमवार सुबह से ही सतना कृषि उपज मंडी के मुख्य द्वार पर किसानों की ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का पहुंचना शुरू हो गया था। मंडी का गेट खुला था, लेकिन खरीदी प्रक्रिया से जुड़े जिम्मेदार कर्मचारी और अधिकारी अपनी निर्धारित जगह पर नजर नहीं आए। मंडी में व्यापारी भी मौजूद नहीं थे। इससे अपनी उपज बेचने पहुंचे किसानों को घंटों इंतजार के बाद निराश होकर लौटना पड़ा।
किसानों पर पड़ा दोहरे परिवहन खर्च का भार
सतना कृषि उपज मंडी जिले का प्रमुख कृषि व्यापार केंद्र है, जहां आसपास के दर्जनों गांवों और तहसीलों से किसान रोजाना अपनी फसल लेकर पहुंचते हैं। सोमवार को खरीदी नहीं होने के कारण कई किसानों को उपज वापस घर ले जानी पड़ी, जबकि कुछ किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लेकर मंडी के बाहर इंतजार करते रहे। मंडी तक फसल लाने में एक बार किराया खर्च हुआ और अब उपज वापस ले जाने के लिए दोबारा परिवहन खर्च करना पड़ रहा है। इससे उनकी लागत बढ़ गई है।
कृषि उपज मंडी के उप संचालक करुणेश तिवारी ने बताया कि मंडी में खरीदी बंद रखने का निर्णय व्यापारियों के लिखित आग्रह के बाद लिया गया था। व्यापारियों ने बैंकों में हड़ताल होने का हवाला देते हुए मंडी में कारोबार बंद रखने के संबंध में लिखित रूप से अनुरोध किया था। इसी के आधार पर सोमवार को मंडी में खरीदी प्रभावित रही।
