हाईवे पर फिर बरसे पत्थर, पुलिस की नींद कब टूटेगी?

धामनोद (धार). मुंबई-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित नया गणेश घाट एक बार फिर पत्थरबाजों के आतंक से दहल उठा। रविवार देर रात अज्ञात बदमाशों ने घाट से गुजर रहे 8 से 10 वाहनों पर अंधाधुंध पथराव कर दिया। अचानक हुए हमले से हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई और यात्रियों में दहशत फैल गई। गनीमत रही कि इस बार कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई, लेकिन कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए और एक व्यक्ति घायल हो गया।

घटना के बाद वाहन चालक सीधे काकड़दा चौकी पहुंचे और कार्रवाई की मांग की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गणेश मंदिर घाट के ऊपरी हिस्से से लगातार पत्थर फेंके जा रहे थे। घायल अशोक कुमार ने बताया कि उनका भतीजा वाहन चला रहा था और पत्थर उन्हें आकर लगा। यदि वही पत्थर चालक को लगता तो हाईवे पर बड़ा हादसा हो सकता था।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह घटना पहली बार नहीं हुई, फिर भी ऐसे असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद कैसे हैं? स्थानीय लोगों का कहना है कि नया गणेश घाट लंबे समय से पथराव और आपराधिक गतिविधियों के कारण बदनाम रहा है। पूर्व में भी यहां वाहनों पर सामूहिक पथराव की गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें कई वाहनों के शीशे टूटे थे और यात्रियों में दहशत का माहौल बन गया था। इसके बावजूद यदि उसी स्थान पर बार-बार घटनाएं दोहराई जा रही हैं तो पुलिस की निगरानी और गश्त व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। पूर्व में भी इसी क्षेत्र में बड़े स्तर पर पथराव की घटनाएं सामने आने की खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं।

राष्ट्रीय राजमार्ग का यह हिस्सा धार जिले के धामनोद थाना और खरगोन जिले की काकड़दा चौकी के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं। ऐसे में बदमाशों द्वारा घाट के ऊपरी हिस्सों से पत्थर फेंकना सीधे-सीधे यात्रियों की जान को जोखिम में डालना है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते सघन पुलिस गश्त, सीसीटीवी निगरानी और संदिग्ध तत्वों पर कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में कोई बड़ी और दर्दनाक घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।

फिलहाल धामनोद पुलिस ने महज चार वाहन चालकों के मामले दर्ज किए है और आरोपियों की तलाश की बात कह रही है, लेकिन हाईवे से गुजरने वाले लोगों के बीच एक ही चर्चा है—जब पहले भी घटनाएं हो चुकी थीं, तब सुरक्षा के स्थायी इंतजाम क्यों नहीं किए गए? और आखिर कब तक यात्रियों की जान यूं ही पत्थरबाजों के भरोसे छोड़ दी जाएगी?

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