नयी दिल्ली, 28 सितंबर (वार्ता) केंद्र सरकार ने इस्पात उद्योग में सुरक्षा मानकों को मजबूत करने के लिए सोमवार को एक शीर्ष निकाय के रूप में इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद (एसआईएससी) की स्थापना की घोषणा की।
इस्पात मंत्रालय ने बताया कि इस परिषद के गठन का उद्देश्य इस्पात उद्योग में सुरक्षा मानकों, कार्यप्रणालियों, दुर्घटना रोकथाम और सुरक्षा जागरूकता को मजबूत बनाना है। यह इस्पात मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करेगा।
परिषद की अध्यक्षता इस्पात मंत्रालय के सचिव करेंगे। इसमें मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, एकीकृत इस्पात उत्पादक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) तथा खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस), पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और मान्यता प्राप्त इस्पात प्रौद्योगिकी संस्थानों सहित प्रमुख तकनीकी और वैधानिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
एसआईएससी इस्पात उद्योग में सुरक्षा की स्थिति का आंकलन करेगी, सुरक्षा कार्यप्रणालियों में अध्ययन और सुधार को सुगम बनायेगी, उद्योग सुरक्षा मानकों और अनुशंसित कार्यप्रणालियों को मंजूरी देगी तथा गंभीर दुर्घटनाओं, दुर्घटनाओं और बाल-बाल टल गयी दुर्घटनाओं की समीक्षा करेगी। यह सुरक्षा जागरूकता, प्रशिक्षण और निवारक उपायों को मजबूत करने के लिए दिशा-निर्देश भी प्रदान करेगी।
परिषद को तकनीकी और पेशेवर सहायता प्रदान करने के लिए इस्पात उद्योग सुरक्षा निदेशालय (एसआईएसडी) की स्थापना की जायेगी। निदेशालय में प्रक्रिया सुरक्षा, ब्लास्ट फर्नेस, इस्पात गलन, रोलिंग मिल, कोक अवन, रिफ्रैक्टरी प्रणालियों, विद्युत एवं यांत्रिक सुरक्षा, व्यावसायिक स्वास्थ्य, अग्नि अभियांत्रिकी और आपदा प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता होगी।
एसआईएसडी परिषद के निर्णयों के कार्यान्वयन की निगरानी करेगा, समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट और समीक्षाएं करेगा, दुर्घटनाओं और बाल-बाल बचने वाली घटनाओं से संबंधित जानकारी का रखरखाव करेगा, गंभीर सुरक्षा घटनाओं की जांच करेगा, आपातकालीन तैयारियों और सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रमों की समीक्षा करेगा तथा भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल इस्पात उद्योग सुरक्षा मानकों, अनुशंसित कार्यप्रणालियों और दिशा-निर्देशों का विकास एवं जारी करेगा।
मंत्रालय ने कहा कि एसआईएससी और एसआईएसडी की स्थापना सुरक्षा की मजबूत संस्कृति को बढ़ावा देने, औद्योगिक दुर्घटनाओं की रोकथाम में सुधार करने और देश के इस्पात उद्योग में एक समान सुरक्षा कार्यप्रणालियों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्थागत कदम है।
