मप्र में 300 लोग रोजाना हो रहे डॉग बाइट के शिकार

साक्षी केसरवानी

भोपाल: 20 लाख की आबादी वाले शहर में आवारा कुत्तों के काटने से रोजाना 81 मामले सामने आ रहे हैं. लेकिन हैरानी की बात यह है कि राजधानी में एक भी स्थायी शेल्टर होम नहीं है. नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक शहर में करीब 1 लाख 20 हजार आवारा कुत्ते सड़कों पर घूम रहे हैं और रोज करीब 15 शिकायतें मिल रही हैं। वहीं पिछले प्रदेश में 5 साल में नसबंदी और टीकाकरण पर करीब 8 करोड़ 56 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद डॉग बाइट के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं. जानकारी के अनुसार भोपाल में महीने में औसतन 2 हजार लोग कुत्ते के काटने का शिकार हो रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सर्वे के मुताबिक 2024 में भोपाल में कुल 19 हजार 285 डॉग बाइट केस दर्ज हुए थे. जबकि इंदौर में 30 हजार 304 और जबलपुर में 13 हजार 619 केस रहे। वहीं 2025 के पहले 6 महीने में जेपी और हमीदिया अस्पताल में 9 तरह के जानवरों के काटने के 13 हजार से ज्यादा मामले सामने आए थे. जिनमें डॉग बाइट के मामले सबसे अधिक थे. जेपी अस्पताल के आंकड़ों के हिसाब से शहर में सालाना करीब 20 हजार डॉग बाइट के मामले होते हैं.
-3.39 लाख डॉग बाइट के शिकार, 10 लाख कुत्ते सड़कों पर
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आईडीएसपी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में साल 2022 में 66 हजार 18, साल 2023 में 1 लाख 13 हजार 499, साल 2024 में 1 लाख 42 हजार 948 और साल 2025 के जनवरी में 16 हजार 710 डॉग बाइट के केस दर्ज हुए। वहीं 2022 से जनवरी 2025 तक कुल 3 लाख 39 हजार लोग कुत्ते के काटने का शिकार हुए. 2024 के आंकड़े बांटें तो हर महीने करीब 11 हजार 912 और हर रोज करीब 392 लोग प्रदेश में डॉग बाइट का शिकार बने। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की रिपोर्ट कहती है कि प्रदेश में 10 लाख 9 हजार से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं, जिनमें 6 लाख से अधिक अकेले इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में हैं.
-3 करोड़ पार बजट में रोजाना 20 नशबंदी
साल 2019 में डॉग बाइट के मामलों को रोकने और कुत्तों की देखभाल का काम 1 करोड़ 60 लाख रुपये में होता था. उसे अब बढ़ाकर 3 करोड़ 91 लाख रुपये सालाना कर दिया गया है. जिसके बावजूद प्रदेश में स्थित 9 शेल्टर केंद्रों पर रोज की नसबंदी का न्यूनतम लक्ष्य 40 से घटाकर 20 कर दिया गया। वहीं राजधानी में अरवलिया, आदमपुर छावनी और कजलीखेड़ा के 3 एबीसी केंद्रों की कुल क्षमता केवल 600 कुत्तों की है और जहां रोजाना 20 से 25 नसबंदी ही की जाती है। हालांकि कोलार में पहला सरकारी शेल्टर बन रहा है, जिसमें करीब 1500 से 2000 कुत्तों को रखा जा सकेगा।
कोर्ट का आदेश हवा, अस्पताल में ही बैठे रहते हैं कुत्ते
सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और खेल परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाने और नसबंदी के बाद उन्हें उसी जगह वापस न छोड़ने का आदेश दिया था. जिसको लेकर मई 2026 में हाईकोर्ट को इसकी निगरानी भी सौंपी। वहीं नगर निगम ने भोपाल में 810 सार्वजनिक जगहों को नो डॉग जोन घोषित कर दिया, लेकिन जमीनी स्तर कोई अंतर नहीं दिखता. जिसका साक्ष्य उदाहरण तो राजधानी के जिला अस्पताल का ही है, जहां आएदिन अस्पताल के अंदर कुत्ते घूमते दिख जाते हैं.

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