भोपाल। मध्य प्रदेश में विकास के साथ पर्यावरण को लेकर भी बड़े दावे किए जा रहे हैं। सरकार की ओर से 27 फीसदी हरित क्षेत्र का दावा सामने आया है। लेकिन सवाल ये है कि कागजों पर दिख रहा ये हरित क्षेत्र जमीन पर कितना नजर आएगा?
21 साल के इंतजार के बाद आखिरकार भोपाल के विकास के मास्टर प्लान का ड्राफ्ट सामने आ गया है। जिसमें विकास के साथ-साथ पर्यावरण पर ध्यान दिया गया है साथ ही हरित क्षेत्र को बढ़ाने की पहल की गई है। ड्राफ्ट में 27 फीसदी हरित क्षेत्र का लक्ष्य तय किया गया है। सुनने में यह लक्ष्य बड़ा जरूर है, लेकिन इसकी असली तस्वीर जमीन पर उतरने के बाद ही साफ होगी।
शहरों में लगातार बढ़ता निर्माण, सड़कें, कॉलोनियां और कम होती खुली जमीन के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस ग्रीन कवर को आखिर सुनिश्चित कैसे किया जाएगा? इसी पड़ताल के लिए हमने टाउन प्लानर और पर्यावरणवादी से भी बात की।
यानी 27 फीसदी हरित क्षेत्र का दावा कितना जमीन पर उतरता है, इसका आकलन सिर्फ आंकड़ों से नहीं, बल्कि शहर में मौजूद वास्तविक हरियाली, पेड़ों और खुले क्षेत्रों से होगा। अब देखना होगा कि 27 फीसदी हरित क्षेत्र का लक्ष्य सिर्फ कागजों तक सीमित रहता है या आने वाले समय में जमीन पर भी इसकी तस्वीर दिखाई देती है।
