रबी सीजन की तैयारियों पर राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ दो दिन का सम्मेलन सोमवार से राजधानी में

नयी दिल्ली, 27 सितंबर (वार्ता) कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय आगामी रबी की खेती की तैयारियों और प्राथमिकताओं पर राज्यों के साथ सोमवार से राजधानी में दो दिन का चर्चा सत्र आयोजित करने जा रहा है।
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के बैनर तले भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार, राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर ( एनएएससी) पूसा के सी सब्रमण्यम सभागार में आयोजित इस सम्मेलन का उद्घाटन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। इसमें राज्यों के कृषि मंत्री, केन्द्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर) के विद्वान तथा अन्य हितधारक शामिल होंगे।
इस दो दिवसीय सम्मेलन में केन्द्र-राज्य तालमेल को मजबूत करने तथा कृषि उत्पादन, उत्पादकता, स्थिरता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक समन्वित एवं परिणाम उन्मुख रणनीति बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। विचार-विमर्श में हाल ही में आयोजित कृषि पर क्षेत्रीय सम्मेलनों से प्राप्त प्रमुख निष्कर्षों और परिणामों को भी आधार बनाया जाएगा।
पहले दिन की चर्चा के महत्वपूर्ण विषयों में कृषि आत्मनिर्भरता, विविधीकरण एवं उत्पादन वृद्धि; स्थिरता एवं जलवायु-अनुकूल कृषि; तथा डिजिटल कृषि, बुनियादी ढांचा तथा वित्तपोषण एवं जोखिम प्रबंधन शामिल हैं। इन्हीं विषयों के तहत दलहन, तिलहन और ऑयल पाम (खाद्य तेल) में आत्मनिर्भरता मिशन, बागवानी, कपास, बीजों की उपलब्धता तथा बीज मूल्य श्रृंखला में सुधार, प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य, कृषि मशीनीकरण, एफपीओ के लिए वित्तपोषण एवं बुनियादी ढांचा, विपणन सुधार, पीएम धन-धान्य कृषि योजना, किसान क्रेडिट कार्ड कवरेज, डिजिटल कृषि, पीएम फसल बीमा योजना, पादप संरक्षण तथा कृषि सांख्यिकी जैसे विषयों पर विस्तार से बातचीत होगी।
दूसरे दिन क्षेत्रीय सम्मेलनों से प्राप्त प्रमुख परिणामों और पहले दिन आयोजित विषयगत चर्चाओं के निष्कर्षों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। कार्यसूची में रबी मौसम के लिए मौसम संबंधी पूर्वानुमान, उर्वरकों की उपलब्धता एवं उर्वरकों के संतुलित उपयोग, डिजिटल कृषि मिशन, किसान रजिस्ट्री, डिजिटल फसल सर्वेक्षण एवं एग्रीस्टैक, दलहन में आत्मनिर्भरता के लिए मिशन, खाद्य तेलों पर राष्ट्रीय मिशन, फसल एवं बीज की स्थिति, किस्मों को अपनाने, पीएम धन-धान्य कृषि योजना, विपणन सुधार तथा एटीएमए और केवीके के माध्यम से कृषि योजनाएं तैयार करने जैसे विषय शामिल होंगे।
इस सम्मेलन में राज्यों के कृषि मंत्रियों को अपने विचार एवं अनुभव, राज्य की प्राथमिकताएं तथा कृषि विकास और रबी मौसम की तैयारियों से संबंधित सुझाव साझा करने का अवसर प्राप्त होगा।

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