नई दिल्ली। GST में बदलाव के बाद भारतीय कार बाजार में छोटी कारों की बिक्री को बढ़ावा मिला है। एंट्री-लेवल हैचबैक सेगमेंट में हिस्सेदारी बढ़ी है, लेकिन इसी अवधि में SUV की बाजार हिस्सेदारी भी मजबूत हुई है। यानी ग्राहकों के बीच किफायती कारों की मांग लौट रही है, साथ ही SUV का आकर्षण भी बना हुआ है।
*छोटी कारों पर टैक्स में कटौती*
22 सितंबर 2025 से लागू GST व्यवस्था में तय मानकों वाली छोटी कारों पर टैक्स दर 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी की गई। दूसरी ओर, मिड-साइज और बड़ी कारों के साथ तय मानकों वाले Utility Vehicles पर 40 फीसदी GST लागू किया गया।
इस बदलाव का मकसद छोटे वाहनों पर टैक्स का बोझ कम करना और उन्हें खरीदारों के लिए अधिक किफायती बनाना था।
*छोटी कारों की बिक्री में सुधार*
SIAM के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में छोटी कारों की बिक्री करीब 13.2 लाख यूनिट रही। इसके बाद मौजूदा वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में बिक्री करीब 27 फीसदी बढ़कर 5.9 लाख यूनिट हो गई।
JATO Dynamics के आंकड़ों में भी एंट्री-लेवल हैचबैक की हिस्सेदारी बढ़ने का संकेत मिलता है। GST बदलाव से पहले इस श्रेणी की बाजार हिस्सेदारी 2.3 फीसदी थी, जो मौजूदा वित्त वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में बढ़कर 3.3 फीसदी हो गई।
*SUV की हिस्सेदारी भी बढ़ी*
छोटी कारों की बिक्री में सुधार के बावजूद SUV सेगमेंट की मांग पर इसका नकारात्मक असर दिखाई नहीं दिया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक SUV की बाजार हिस्सेदारी 56 फीसदी से बढ़कर 58 फीसदी हो गई।
SUV में ज्यादा स्पेस, ऊंची ड्राइविंग पोजिशन और फीचर्स जैसे पहलू ग्राहकों के लिए आकर्षण का कारण बने हुए हैं। वहीं छोटी कारें कम बजट में कार खरीदने वाले और पहली बार चारपहिया वाहन लेने वाले ग्राहकों के लिए अहम विकल्प बनी हुई हैं।
*बाजार में एक साथ दो ट्रेंड*
GST में बदलाव के बाद छोटी कारों के सेगमेंट में बिक्री और बाजार हिस्सेदारी बढ़ी है। दूसरी ओर SUV की हिस्सेदारी भी बढ़ी है। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय कार बाजार में किफायती छोटी कारों की मांग और SUV की लोकप्रियता दोनों साथ-साथ आगे बढ़ रही हैं।
आने वाले महीनों की बिक्री से यह स्पष्ट होगा कि छोटी कारों में आई तेजी कितनी स्थायी रहती है और ग्राहकों की SUV को लेकर मौजूदा पसंद किस तरह आगे बढ़ती है।
