एआई के इस्तेमाल में सुरक्षा उपाय अपनाना जरूरी : जयशंकर

न्यूयॉर्क, 26 सितंबर (वार्ता) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) समुद्री सुरक्षा को बदलने की क्षमता रखती है, लेकिन इसके साथ नयी सुरक्षा चुनौतियां भी पैदा हो सकती हैं।
डॉ जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर यूनान के विदेश मंत्री जॉर्ज गेरापेत्रितिस के साथ “अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के संदर्भ में एआई, समुद्री सुरक्षा पर विशेष जोर के साथ” विषय पर आयोजित कार्यक्रम की सह-अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि देशों को तकनीकी नवाचार और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच संतुलन कायम करना होगा।
उन्होंने जहाजों, संचार नेटवर्क और समुद्र के भीतर मौजूद महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाले साइबर अभियानों तथा उन्नत निगरानी जैसे संभावित जोखिमों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा उपायों पर जोर दिया।

श्री जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि एआई की संभावनाओं का इस्तेमाल करने, उसके परिणामों का अनुमान लगाने और जोखिमों को कम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऐसा दृष्टिकोण जरूरी है जो नवाचार को बढ़ावा दे और साथ ही उसके सुरक्षा प्रभावों को ध्यान में रखे। उन्होंने कहा कि भारत घोषणा में एआई संसाधनों तक लोकतांत्रिक पहुंच, सुरक्षित एवं विश्वसनीय प्रणालियों के निर्माण, मानव क्षमता में निवेश और आर्थिक विकास तथा सामाजिक कल्याण के लिए एआई के इस्तेमाल का आह्वान किया गया है।

श्री जयशंकर ने समुद्री क्षेत्र में एआई के संभावित इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उपयोग समुद्री गतिविधियों की निगरानी, खोज एवं बचाव, आपदा प्रबंधन, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और बंदरगाहों तथा अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की मजबूती के लिए किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, “एआई समुद्री क्षेत्र में जागरूकता, खोज एवं बचाव, आपदा प्रतिक्रिया, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और बंदरगाहों तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की मजबूती को बढ़ा सकता है।”

उन्होंने चेतावनी दी कि यही तकनीक समुद्री बुनियादी ढांचे और जहाजों के खिलाफ भी इस्तेमाल की जा सकती है। उन्होंने कहा, “इसके साथ ही यह जहाजों, संचार नेटवर्क और समुद्र के भीतर मौजूद बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए उन्नत निगरानी, कमजोरियों की पहचान और साइबर अभियानों को सक्षम कर सकती है।”

श्री जयशंकर ने कहा कि समुद्री प्रणालियों में बढ़ती स्वायत्तता से जिम्मेदारी और तनाव बढ़ने से जुड़े सवाल और जटिल हो सकते हैं। इससे मानवीय निर्णय लेने के लिए उपलब्ध समय भी कम हो सकता है। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति अंतरराष्ट्रीय नियमों के अधीन रहनी चाहिए। समुद्री क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र चार्टर और समुद्र के कानून समेत अंतरराष्ट्रीय कानून देशों के आचरण के लिए महत्वपूर्ण ढांचा बने हुए हैं।

उन्होंने इन सिद्धांतों के अनुरूप एआई के विकास और इस्तेमाल के लिए अधिक पारदर्शिता, विश्वास निर्माण के उपायों, क्षमता विकास, तकनीकी सहयोग और सर्वोत्तम तौर-तरीकों के आदान-प्रदान का आह्वान किया। श्री जयशंकर ने कहा कि एआई और समुद्री सुरक्षा संयुक्त राष्ट्र में भारत की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

ईरान युद्ध के बाद हाल के दिनों में समुद्री सुरक्षा पर चर्चा तेज हुई है। वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों को प्रमुख समुद्री मार्गों पर हमलों और व्यवधानों का सामना करने के बीच यह भारत के लिए भी चिंता का विषय बनकर उभरा है। आर्थिक मोर्चे पर श्री जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर न्यूयॉर्क में भारत-खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) ट्रोइका मंत्रिस्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता की।

बैठक में भारत-जीसीसी संयुक्त कार्ययोजना 2024-28 के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की गई और छह सदस्यीय खाड़ी समूह के साथ सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा हुई। श्री जयशंकर ने कहा कि उन्होंने भारत-जीसीसी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए वार्ता शुरू किए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने व्यापार, निवेश, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, नयी प्रौद्योगिकियों, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क समेत विभिन्न क्षेत्रों में संबंध मजबूत करने की उम्मीद जताई।

उन्होंने जीसीसी देशों के नेताओं द्वारा भारतीय समुदाय को दिए जा रहे समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया और समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने नौवहन की स्वतंत्रता तथा नाविकों और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। जीसीसी में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। भारत के इन देशों के साथ व्यापार, ऊर्जा, निवेश तथा भारतीय कामगारों और पेशेवरों की आवाजाही के क्षेत्र में व्यापक आर्थिक एवं रणनीतिक संबंध हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में श्री जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र साइबर अपराध सम्मेलन पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने इसे साइबर अपराध से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

उन्होंने कहा, “आज संयुक्त राष्ट्र साइबर अपराध सम्मेलन पर हस्ताक्षर किए। यह सम्मेलन सुरक्षित डिजिटल भविष्य के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करता है।” यह कदम इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से निपटने और डिजिटल नेटवर्क के जरिए किए जाने वाले अपराधों के खिलाफ समन्वय समेत साइबर अपराध से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने के प्रयासों के बीच उठाया गया है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में उच्चस्तरीय बैठकों से इतर श्री जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रमों और ब्रिक्स के तहत सहयोग की समीक्षा की तथा विभिन्न मौजूदा मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

रूस के विदेश मंत्रालय ने भी संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के उच्चस्तरीय सप्ताह से इतर दोनों नेताओं की मुलाकात की पुष्टि की। श्री जयशंकर की न्यूयॉर्क में हुई बैठकों में प्रौद्योगिकी, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, साइबर अपराध और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। भारत संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच का इस्तेमाल उभरती सुरक्षा चुनौतियों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और प्रमुख साझेदारों के साथ आर्थिक एवं कूटनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए कर रहा है।

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