
नयी दिल्ली, 26 सितंबर (वार्ता) ऑटिज्म और सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों के परिजनों ने उच्चतम न्यायालय से अपनी चिंताओं को मौखिक रूप से सुनने की अपील की है। ऑटिज्म और सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों के परिजनों ने शनिवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में शीर्ष अदालत से मौखिक सुनवाई, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत बच्चों के स्वास्थ्य के अधिकार की सुरक्षा, पीड़ित परिवारों द्वारा प्रस्तुत क्लिनिकल रिकॉर्ड और अनुभवों पर विचार तथा अदालत के सामने रखे गए वैज्ञानिक शोध की स्वतंत्र समीक्षा करने की गुजारिश की। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से आये परिजनों ने अपनी चिंताएं व्यक्त की।
यह मांग पैरेंट्स फोरम फॉर स्टेम सेल्स इन ऑटिज्म एंड सेरेब्रल पल्सी की ओर से उठाई गयी।
फोरम यश चैरिटेबल ट्रस्ट एंड अन्य बनाम भारत संघ एंड अन्य मामले में प्रतिवादी है। फोरम के अनुसार, जनवरी 2025 में मामले की पहली सुनवाई के दौरान उसके अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष अपनी बात रखने की अनुमति मांगी थी, लेकिन उन्हें लिखित दलीलें दाखिल करने के लिए कहा गया। फोरम ने कहा, “हमारी मांग है कि हमें सुना जाए।” इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से आए माता-पिता और परिवार के सदस्यों ने अपने बच्चों के उपचार और स्टेम सेल थेरेपी के बाद देखे गए बदलावों के बारे में बताया।
डॉ. संध्या गोकोवरापु ने कहा, “पहले से उपचार ले रहे बच्चे को तब तक उपचार बंद करने के लिए नहीं कहा जा सकता, जब तक यह स्पष्ट न हो कि उसके लिए उपयुक्त क्लिनिकल परीक्षण उपलब्ध है या नहीं और वह बच्चा उसमें शामिल होने के योग्य है या नहीं।” फोरम के उपाध्यक्ष अरुण कुमार तिवारी ने कहा, “हम न्यायालय से हमें सुनने, हमारे द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की जांच करने और पहले से उपचार ले रहे बच्चों पर फैसले के प्रभावों पर विचार करने की मांग कर रहे हैं।”
