इंदौर: एमटीएच अस्पताल में पीजी छात्रा की रैगिंग और ड्यूटी को लेकर हुई शिकायत के बाद अब पूरे विभाग की व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है. तीन समितियां गठित करने के साथ वरिष्ठ डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं. यूनिट हेड भी बदल दिया है, यहां तक कि विभाग के माहौल पर नजर रखने के लिए दो वरिष्ठ प्रोफेसरों को पर्यवेक्षक बनाया है.
डीन ने डॉक्टरों, पीजी छात्रों और सीनियर रेजिडेंट्स के साथ बैठक कर कार्यस्थल के माहौल, ड्यूटी व्यवस्था, तनाव प्रबंधन और आपसी संवाद पर चर्चा की. प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठ द्वारा जूनियर को परेशान करना, धमकाना, सार्वजनिक रूप से अपमानित करना या किसी तरह का अनुचित व्यवहार करना रैगिंग की श्रेणी में माना जाएगा.
पीएसएम के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. सलील और डॉ. बीना को विभाग की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है. दोनों रोज छात्रों से संवाद कर माहौल की जानकारी लेंगे और किसी समस्या की स्थिति में डीन को रिपोर्ट करेंगे.
दूसरे प्रोफेसर को यूनिट की जिम्मेदारी देकर विभाग की व्यवस्था सामान्य करने और ड्यूटी संबंधी समस्या सुलझाने का दायित्व सौंपा है, वे छात्रा के मेंटर भी हैं. ड्यूटी व्यवस्था में भी बदलाव स्पष्ट किया है. सामान्य तौर पर पीजी डॉक्टरों की आठ घंटे की ड्यूटी का रोस्टर रहेगा, जबकि आपात स्थिति में अधिकतम 12 घंटे तक ड्यूटी ली जा सकेगी. रैगिंग की शिकायत पर गठित तीनों समितियों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. मामले की शुरुआत पीजी प्रथम वर्ष की छात्रा डॉ. सिम्मी यादव से जुड़ी शिकायत से हुई थी. उनके पिता और भाई ने रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना की शिकायत की थी. छात्रा को इंसुलिन की अधिक मात्रा लेने के बाद आईसीयू में भर्ती कराया था. भाई कुणाल यादव ने एनएमसी के एंटी रैगिंग सेल में भी शिकायत की थी.
जीरो टॉलरेंसः डॉ. घंगोरिया
डीन डॉ. अरविंद घंगोरिया का कहना है कि विभाग में बेहतर कार्यस्थल का माहौल बनाए रखना प्राथमिकता है. रैगिंग के प्रति जीरो टॉलरेंस है और छात्रों की समस्याओं को नियमित संवाद के जरिए समझकर उनका समाधान किया जाएगा.
