वाशिंगटन, 25 सितंबर (वार्ता) अमेरिका के अपने आप्रवासन हिरासत क्षमता बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर खर्च किए जाने के बावजूद, खराब योजना और अचानक लिए गए फैसलों के कारण बड़ी धनराशि बेकार हो गयी है। सरकारी जवाबदेही कार्यालय से जारी एक ऑडिट रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रवासन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) विभाग ने आवश्यक विश्लेषण और योजना के बिना जनवरी 2025 से छह बड़े विस्तार अभियानों को आगे बढ़ाया, जिनमें से आधे से अधिक पहलों को बाद में वापस लेना पड़ा। इसका सबसे बड़ा उदाहरण एजेंसी का वेयरहाउस कार्यक्रम था, जिसके तहत इस वर्ष जनवरी से अप्रैल के बीच हिरासत केंद्र बनाने के लिए 1.07 अरब डॉलर में 11 गोदाम खरीदे गए थे। हालांकि, जून तक इनमें से सात गोदामों को बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
एजेंसी ने इन सात संपत्तियों पर गैर-वापसी योग्य लागतों (जैसे जोनिंग आकलन और शीर्षक बीमा) के रूप में 7.7 मिलियन डॉलर और रखरखाव व सुरक्षा पर 12.8 मिलियन डॉलर पहले ही गंवा दिए हैं। यदि ये गोदाम खरीद मूल्य से कम पर बिकते हैं, तो वित्तीय नुकसान और बढ़ेगा। इसके अतिरिक्त, जुलाई में 1.5 अरब डॉलर में दो मौजूदा हिरासत केंद्र खरीदे गए, लेकिन लंबी अवधि के रखरखाव और संचालन लागत का कोई आकलन नहीं किया गया।
रिपोर्ट में उजागर किया गया है कि आईसीई के पास हिरासत क्षमता को लेकर कोई स्पष्ट या सुसंगत लक्ष्य नहीं था। ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल एक्ट’ और ‘सिक्योर अमेरिका एक्ट’ के तहत एजेंसी को 2029 तक हिरासत क्षमता के लिए 45 अरब डॉलर दिए गए थे, लेकिन 2029 के बाद की वित्तीय योजना का कोई खाका तैयार नहीं किया गया। खराब योजना के कारण परिचालन लागत में भी भारी बढ़ोतरी देखी गई। उदाहरण के लिए, फ्लोरिडा के बंद हो चुके केंद्र में प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 249 डॉलर खर्च किए गए, जो सामान्य दर (92 डॉलर) से 171 प्रतिशत अधिक था। इसके अलावा, टेक्सास के कैंप ईस्ट मोंटाना में कम उपस्थिति के बावजूद 7.1 मिलियन डॉलर का अनावश्यक भोजन ठेका दिया गया, और गुआंतानामो बे में 2.85 मिलियन डॉलर के तंबू लगाए गए जिनका उपयोग ही नहीं हुआ।
जीएओ के होमलैंड सिक्योरिटी निदेशक हीदर मैकलियोड ने कहा कि व्यापक योजना के अभाव में बार-बार काम रुकने और शुरू होने से संसाधनों की भारी बर्बादी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, 20 जनवरी 2025 से 30 जुलाई 2026 के बीच हिरासत में लिए गए लोगों की दैनिक औसत संख्या 39,314 से बढ़कर 67,180 पहुंच गई (71 प्रतिशत की वृद्धि), जबकि स्वीकृत केंद्रों की संख्या 134 से बढ़कर 272 हो गई। जीएओ ने एजेंसी को आगे के बजट का उपयोग करने से पहले एक व्यापक रणनीतिक योजना विकसित करने की सिफारिश की है।
