
सुसनेर, नगर परिषद अध्यक्ष पद के उपचुनाव में नाम वापसी के बाद अब भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है. दोनों प्रमुख दलों ने अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं और चुनाव प्रचार को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं. ऐसे में मतदाताओं के बीच राजनीतिक दलों की रणनीति के साथ-साथ नगर के मूलभूत मुद्दे भी चर्चा का विषय बने हुए हैं.
चुनावी मैदान में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही विकास और जनहित के मुद्दों को प्रमुखता देने की बात कर रहे हैं, लेकिन मतदाताओं के सामने कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब चुनाव प्रचार के दौरान प्रत्याशियों और दलों को देना होगा. नगर में सडक़, नाली, सफाई, पेयजल, यातायात व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट और अन्य नागरिक सुविधाएं लंबे समय से स्थानीय चर्चा का हिस्सा रही है. भाजपा के लिए चुनाव में संगठन की ताकत और अपने कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों को जनता के सामने रखने का अवसर है. वहीं मतदाता यह जानना चाहते हैं कि नगर की जिन समस्याओं का समाधान अभी बाकी है, उन्हें पूरा करने के लिए पार्टी की आगामी कार्ययोजना क्या होगी. केवल राजनीतिक दावों के बजाय वार्ड स्तर की समस्याओं और उनके समाधान की समयसीमा पर भी सवाल उठ रहे हैं.
मुद्दे बनाम राजनीति…
उपचुनाव में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि दोनों दल स्थानीय समस्याओं को किस तरह अपने चुनावी एजेंडे में शामिल करते हैं. मतदाताओं के बीच यह चर्चा भी है कि चुनाव प्रचार व्यक्तिगत या दलगत राजनीति तक सीमित रहने के बजाय नगर के विकास के मुद्दों पर केंद्रित होना चाहिए.
कांग्रेस के सामने भी जनता के सवाल
कांग्रेस प्रत्याशी के सामने सत्ता पक्ष के कामकाज पर सवाल उठाने के साथ अपनी वैकल्पिक कार्ययोजना जनता तक पहुंचाने की चुनौती है. मतदाता यह भी जानना चाहेंगे कि यदि कांग्रेस को नगर परिषद की जिम्मेदारी मिलती है, तो प्राथमिकता वाले कार्य कौन से होंगे और उन्हें पूरा करने के लिए ठोस योजना क्या है.
