भोपाल। वरिष्ठ कांग्रेस प्रवक्ता अभय दुबे ने मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और नौ सरकारी मेडिकल कॉलेजों एवं अस्पतालों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर संचालित किए जाने के प्रस्ताव को लेकर सवाल उठाए हैं। मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड ने नौ ब्राउनफील्ड मेडिकल कॉलेजों और 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर संचालित करने के लिए ट्रांजेक्शन एडवाइजर नियुक्त करने की निविदा जारी की है।
दुबे ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप विवाद से जुड़ी बच्चों की मौतों, इंदौर के भगीरथपुरा में दूषित पानी की घटना, बालाघाट के आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण से हुई मौतों तथा सागर शराब त्रासदी का हवाला देते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की। उन्होंने पैथोलॉजी जांच में कथित घोटाले और इंदौर में कथित किडनी रैकेट के आरोपों पर भी स्पष्टीकरण मांगा।
उन्होंने पूछा कि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप व्यवस्था लागू होने के बाद एससी/एसटी/ओबीसी आरक्षण, गरीब एवं बीपीएल मरीजों के लिए निःशुल्क उपचार और अन्य सरकारी सुविधाएं किस प्रकार सुनिश्चित की जाएंगी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ब्राउनफील्ड संस्थानों पर नीति आयोग के ग्रीनफील्ड पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल को किस आधार पर लागू किया जा रहा है।
दुबे ने सरकार से एमपीपीएचएससीएल के आरएफपी, कन्सेशन व्यवस्था और मरीजों के हितों की सुरक्षा से जुड़ी शर्तें सार्वजनिक करने की मांग की।
