नयी जीडीपी श्रृंखला के आंकड़ों के स्रोतों, विधियों पर सरकार ने जारी की विस्तृत रिपोर्ट

नयी दिल्ली, 21 सितंबर (वार्ता) नयी श्रृंखला के तहत जारी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के ताजा आंकड़ों और गणन-पद्धति को लेकर छिड़ी बहस के बीच सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने सोमवार को “राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी संकलन स्रोत और विधियां” शीर्षक रिपोर्ट जारी की जो डाटा संकलन और गणना के नये तौर तरीकों का सविस्तार विवरण प्रस्तुत करता है।

मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में कहा कि कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट दर्शाती है कि नयी जीडीपी श्रृंखला एक अधिक मजबूत, पारदर्शी और डेटा-आधारित राष्ट्रीय लेखा व्यवस्था के लिए पहले से अच्छी पद्धति पर आधारित है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था की नयी उभरती संरचना को बेहतर ढंग से दर्शाती है।

इस रिपोर्ट में आपूर्ति एवं उपयोग सारणी (एसयूटी) संकलन की पद्धति और क्षेत्रीय लेखा के लिए दिशानिर्देश भी शामिल किये गये हैं।

मंत्रालय ने कहा है कि यह प्रकाशन नई श्रृंखला में अपनाई गई अवधारणाओं, परिभाषाओं, डेटा स्रोतों, कार्यप्रणालियों और संकलन विधियों का एक समेकित विवरण प्रदान करता है जिसे ‘जीडीपी की श्रृंखला के जारी होने के बाद सात महीने के रिकॉर्ड समय में प्रकाशित किया जा रहा है।’

नयी श्रृंखला राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी के आधार वर्ष का आठवां संशोधन है।

अद्यतन श्रृंखला वित्तीय वर्ष 2022-23 के आधार पर तैयार की गयी है जबकि पिछली श्रृंखला 2011-12 के आधार पर थी। नयी श्रृंखला में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही की जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत दिखायी गयी है। कुछ आलोचकों ने इस पर सवाल खड़े किये जिसकों लेकर बहस ने राजनीतिक रूप ले लिया।

मंत्रालय ने 27 फरवरी 2026 को आधार वर्ष 2022-23 के साथ राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी की नयी श्रृंखला जारी की थी और जून 2026 में जारी किए गए उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई), औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) आदि की नई श्रृंखला के कारण हुए परिवर्तनों को शामिल करने के लिए इसे 31 अगस्त 2026 को इसे अद्यतन किया गया था।

आधार वर्ष संशोधन अभ्यास के विशिष्ट पहलुओं पर विचार-विमर्श करने के लिए 27 जून 2024 को इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ, आईईजी के विज़िटिंग फैकल्टी प्रोफेसर बी.एन. गोल्डर की अध्यक्षता में राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी सलाहकार समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने विभिन्न विषयों पर कई उप समितियों का गठन किया था। इसमें जीएसटीएन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनीष कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में नए डेटा स्रोतों, दरों और अनुपातों को शामिल करने के विषय में , इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट के प्रोफेसर डॉ. जी.सी. मन्ना की अध्यक्षता में कार्यप्रणाली सुधार के विषय में ; आईईजी के विज़िटिंग फैकल्टी, प्रोफेसर बी.एन. गोल्डर की अध्यक्षता में स्थिर मूल्य अनुमानों के लिए और इन क्षेत्रों में केंद्रित चर्चा के लिए आईआईएम, अहमदाबाद के सेवानिवृत्त प्रोफेसर आर.एच. ढोलकिया की अध्यक्षता में क्षेत्रीय लेखा उप-समितियों का गठन किया।

समिति ने चर्चा के लिए नौ बैठकें आयोजित कीं तथा देश भर के शिक्षाविदों, विषय विशेषज्ञों, केंद्रीय और राज्य सरकारी विभागों, नीति आयोग और विभिन्न विचारक समूहों को शामिल करते हुए कार्यशालाएं और सेमिनार भी आयोजित किए। इसके अलावा उप-समितियों ने विशिष्ट कार्यप्रणाली और डेटा संबंधी मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए 35 से अधिक बैठकें कीं।

मुंबई (26 नवंबर 2025), नई दिल्ली (23 दिसंबर 2025) और चेन्नई (30 जनवरी 2026) में तीन डेटा उपयोगकर्ता सम्मेलन आयोजित किए गए, जिनमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, शिक्षाविद, नीति निर्माता और डेटा उपयोगकर्ता शामिल हुए।

राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी की नई श्रृंखला के संकलन के लिए अपनायी जाने वाली कार्यप्रणाली के लिए उप-समितियों की रिपोर्टों में की गयी सिफारिशों को “राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी के संकलन के स्रोत और विधियां” प्रकाशन में शामिल किया गया है।

इस प्रकाशन में गैर-वित्तीय निजी कॉरपोरेट (एनएफपीसी) क्षेत्र के संबंध में, रिपोर्ट में उद्योग वर्गीकरण, आर्थिक गतिविधि के मापन और विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में उत्पादन के आवंटन में सुधार के लिए कॉरपोरेट फाइलिंग, एलएलपी रिकॉर्ड और उन्नत कंपनी-स्तरीय जानकारी के विस्तृत उपयोग पर प्रकाश डाला गया है। वित्तीय क्षेत्र के लिए डेटा पहुंच में विस्तार किया गया है।

सामान्य सरकारी क्षेत्र के लिए, संस्थागत पहुंच में विस्तार, पेंशन भुगतान में सुधार और कर्मचारियों को प्रदान की गई आवास सुविधाओं के मूल्य को शामिल करने जैसे परिवर्तन किए गए हैं। घरेलू क्षेत्र में, कई वैकल्पिक पद्धतियों का मूल्यांकन करने के बाद, मंत्रालय के गैर-निगमित क्षेत्र उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण (एएसयूएसई) और आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) से प्रत्यक्ष अनुमान पद्धति को अपनाया गया है।

इसमें व्यय पक्ष के अनुमानों और त्रैमासिक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) संकलन में महत्वपूर्ण सुधारों का भी उल्लेख किया गया है।

इसमें निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) के लिए संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्य के अनुसार व्यक्तिगत उपभोग वर्गीकरण (सीओआईसीओपी) 2018 वर्गीकरण ढांचे को अपनाया गया है, जो अधिक विस्तृत उपभोग डेटा और प्रशासनिक स्रोतों पर आधारित है।

इसमें निर्माण, कृषि, पशुधन, वानिकी और सेवा उद्योगों के लिए संकलन पद्धतियों में भी संशोधन किया गया है । रिपोर्ट त्रैमासिक राष्ट्रीय लेखा के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और अन्य प्रशासनिक डेटा के बढ़ते उपयोग पर जोर दिया गया है।

 

 

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