*कूनो में चार साल में 53 चीते… अब आगे क्या? बढ़ती आबादी के साथ सामने आई ये सबसे बड़ी चुनौती, जानिए*

श्योपुर। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट ने चार साल का सफर पूरा कर लिया है। 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए 8 चीतों के साथ शुरू हुआ यह अभियान अब 53 चीतों तक पहुंच चुका है। इनमें 37 चीते भारत में जन्मे हैं। प्रजनन के जरिए आबादी बढ़ना प्रोजेक्ट की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, लेकिन अब वन विभाग के सामने बढ़ती आबादी के लिए पर्याप्त क्षेत्र, शिकार और सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराने की चुनौती है।

*कूनो में 17 चीते खुले वन क्षेत्र में* वर्तमान व्यवस्था के अनुसार कूनो में 17 चीते खुले वन क्षेत्र में हैं। इनमें 10 नर और 7 मादा शामिल हैं। वहीं 36 चीते सॉफ्ट रिलीज बाड़ों में रखे गए हैं। इनमें 5 नर, 8 मादा और एक साल से कम उम्र के 23 शावक शामिल हैं।

खुले जंगल में चीतों को छोड़ने की प्रक्रिया प्रोजेक्ट के अगले चरण को दिखाती है। हालांकि, आबादी बढ़ने के साथ चीतों के लिए पर्याप्त टेरिटरी और शिकार की उपलब्धता महत्वपूर्ण हो गई है। जंगल में दूसरे मांसाहारी वन्यजीवों के साथ प्रतिस्पर्धा और शावकों का सुरक्षित रहना भी लगातार निगरानी का विषय है।*80 चीतों का लक्ष्य, नई पीढ़ी पर नजर*

कूनो में चीतों की संख्या को 80 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मौजूदा 53 के मुकाबले यह 27 चीतों की बढ़ोतरी होगी। इस लक्ष्य में भारत में जन्मी नई पीढ़ी की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।अब चुनौती सिर्फ नए शावकों के जन्म की नहीं है। उन्हें प्राकृतिक परिस्थितियों में सुरक्षित रखना, पर्याप्त भोजन और क्षेत्र उपलब्ध कराना तथा उनकी निगरानी करना भी उतना ही जरूरी है।*कूनो से गांधीसागर तक बढ़ रहा दायरा*

चीतों को बड़े खुले वन क्षेत्र और पर्याप्त शिकार की आवश्यकता होती है। आबादी बढ़ने के साथ एक ही क्षेत्र पर निर्भरता कम करना भी जरूरी हो गया है। इसी रणनीति के तहत गांधीसागर को चीता संरक्षण के दूसरे प्रमुख क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।आगे दूसरे उपयुक्त वन क्षेत्रों में भी चीतों को बसाने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के संभावित क्षेत्रों पर भी नजर रखी जा रही है।

*चीता प्रोजेक्ट पर कितना खर्च?*चीता प्रोजेक्ट के शुरुआती पांच वर्षों के लिए करीब 39 करोड़ रुपये का अनुमानित बजट तय किया गया था। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने CSR के तहत करीब 50 करोड़ रुपये का सहयोग दिया है।कूनो की वार्षिक परिचालन योजना के मुताबिक, वर्ष 2023 में चीता प्रबंधन और पार्क के रखरखाव पर करीब 10.2 करोड़ रुपये खर्च हुए। वर्ष 2024-25 के लिए यह राशि करीब 14.4 करोड़ रुपये प्रस्तावित थी।

मध्य प्रदेश विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में चीतों के भोजन और उन्हें स्वस्थ रखने पर करीब 1.90 करोड़ रुपये खर्च हुए। अकेले 2024-25 में बकरे के मीट की खरीद पर करीब 1.27 करोड़ रुपये खर्च किए गए।*नामीबिया के 8 चीतों से शुरू हुआ सफर*17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीते भारत लाए गए थे। इसके करीब छह महीने बाद 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते भारत पहुंचे।

समय के साथ चीतों के प्रजनन से भारत में उनकी संख्या बढ़ी और अब कूनो में जन्मे 37 चीते इस प्रोजेक्ट की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हैं।चीतों की निगरानी के लिए रेडियो कॉलर और फील्ड टीमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं स्थानीय ग्रामीणों और ‘चीता मित्रों’ को भी संरक्षण गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।*अब संख्या से ज्यादा सुरक्षित भविष्य पर फोकस*चार साल में 53 चीतों तक पहुंचना प्रोजेक्ट के लिए एक अहम पड़ाव है। लेकिन बढ़ती आबादी के साथ चुनौती भी बदल गई है।

अब जरूरत है पर्याप्त टेरिटरी, शिकार, स्वास्थ्य निगरानी और सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण की। खासकर शावकों और युवा चीतों का सुरक्षित रहना आने वाले वर्षों में प्रोजेक्ट की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।यानी कूनो की अगली चुनौती सिर्फ चीतों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि भारत में एक ऐसी स्थायी और सुरक्षित चीता आबादी तैयार करना है, जो आने वाली पीढ़ियों तक जंगल में अपना अस्तित्व कायम रख सके।

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