
जबलपुर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण, एनजीटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव व विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की युगलपीठ ने हाथी कारीडोर को इको-सेंसिटिव जोन घोषित करने की मांग के मामले में सुनवाई करते हुए राज्य शासन सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है।
याचिका में मध्य प्रदेश राज्य द्वारा प्रस्तावित हाथी कॉरिडोर को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत इको-सेंसिटिव जोन घोषित करने पर बल दिया गया है। सुनवाई के दौरान आवेदक ने अनुमति मांगी कि वह मूल आवेदन से प्रार्थना खंड-ए को हटाना चाहता है, क्योंकि उक्त अनुमति नौ मई 2025 व 22 मई 2025 के संबंध में पृथक अपील दायर की गई है। अधिकरण ने मांग को स्वीकार करते हुए एक सप्ताह में संशोधन करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से एनजीटी के पूर्व आदेशों का उल्लेख किया गया, जिसमें देशभर के हाथी कॉरिडोर को इको-सेंसिटिव जोन घोषित करने के मुद्दे पर विचार किया गया था तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को आवश्यक कार्रवाई हेतु निर्देशित किया गया था। यह भी कहा गया किया गया कि लोकसभा में वर्ष 2018 में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मध्य प्रदेश के दो हाथी कॉरिडोर-सिंगरौली-सीधी-गुरु घासीदास, सीधी-सिंगरौली-पलामू प्रस्तावित बताए गए थे, किन्तु इनके इको-सेंसिटिव जोन के रूप में अधिसूचना संबंधी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। क्षेत्राधिकार संबंधी आपत्ति पर यह दलील दी गई कि उक्त कॉरिडोर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व झारखंड राज्यों में फैले हुए हैं तथा पूर्व संबंधित आदेश प्रधान पीठ द्वारा पारित किए गए थे, अत: मामले की सुनवाई प्रधान पीठ द्वारा की जानी उचित है। सभी तकनीकी आपत्तियां खुली रखते हुए अधिकरण ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया तथा उन्हें अगली तिथि से कम से कम एक सप्ताह पूर्व शपथ पत्र के माध्यम से उत्तर प्रस्तुत करने कहा। आवेदक को भी प्रतिवादियों को नोटिस की सेवा कर सेवा-प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 26 मई को निर्धारित की गई है।
