
कोच्चि, 20 सितंबर (वार्ता) भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान (आईसीएआई) ने एसएसए 5000 – ‘सस्टेनेबिलिटी एश्योरेंस एंगेजमेंट्स के लिए सामान्य आवश्यकताएं और फ्रेमवर्क’ जारी किया है।
एसएसए 5000 अंतर्राष्ट्रीय फ्रेमवर्क आईएसएसए 5000 के अनुरूप है। आईसीएआई ने रविवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि यह देश में सस्टेनेबिलिटी एश्योरेंस पारितंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। वैश्विक फ्रेमवर्क में भारतीय संदर्भ के हिसाब से कुछ बदलाव किए गए हैं। इस व्यापक फ्रेमवर्क का मकसद सस्टेनेबिलिटी एश्योरेंस एंगेजमेंट्स के लिए एक मजबूत और एक समान आधार प्रदान करना है। साथ ही सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग की बदलती जरूरतों को भी पूरा करना है।
एसएसए 5000 वित्त वर्ष 2027-28 से या उसके बाद लागू हो सकेगा।
आईसीएआई के अध्यक्ष प्रसन्ना कुमार डी ने कहा, “एसएसए 5000 देश में सस्टेनेबिलिटी एश्योरेंस को वैश्विक मानकों के स्तर पर ले जाएगा।” यह सिद्धांतों पर आधारित एक व्यापक फ्रेमवर्क है जिसे निवेशकों और हितधारकों के बीच स्थाई भरोसा जगाने के लिए तैयार किया गया है।”
आईसीएआई के उपाध्यक्ष मंगेश किनरे ने कहा कि एसएसए 5000 सस्टेनेबिलिटी एश्योरेंस के दायरे को बढ़ाता है और साथ ही अलग-अलग रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क को समान सख्ती और एकरूपता के साथ शामिल करता है।
देश की शीर्ष 1,000 कंपनी के लिए पर्यावरणीय, सामाजिक तथा प्रशासन (ईएसजी) के स्तर पर अपने काम के बारे में जानकारी देना जरूरी है। कंपनी उसके बारे में स्व-घोषणा करती है और उसके बाद एक चार्टर्ड अकाउंटेंट जो इन विषयों का विशेषज्ञ होता है, इसे प्रमाणित करता है। रिपोर्ट को इकाई अपनी वेबसाइट पर जारी करता है। इस प्रकार सस्टेनेबिलिटी एश्योरेंस की प्रक्रिया पूरी होती है।
एक बार एसएसए 5000 लागू हो जाने के बाद, एसएसएई 3000 और एसएई 3410 अपने-आप समाप्त हो जाएंगे
