इंदौर:अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है. एमजीएम मेडिकल कॉलेज को यलो फीवर टीकाकरण केंद्र स्थापित करने की औपचारिक स्वीकृति मिल गई है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय से मंजूरी मिलने के साथ ही एमजीएम मेडिकल कॉलेज मध्यप्रदेश का पहला सरकारी मेडिकल कॉलेज बन गया है, जहां यलो फीवर टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध होगी.
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि यह स्वीकृति संस्थान के लिए गर्व का विषय है. इस केंद्र की स्थापना से न केवल इंदौर, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश और आसपास के क्षेत्रों के अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा. अब यलो फीवर टीकाकरण के लिए लोगों को अन्य राज्यों या निजी केंद्रों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. इस स्वीकृति से पहले सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की गईं. 10 दिसंबर को एमजीएम मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा और पैरामेडिकल स्टाफ का विशेष प्रशिक्षण मुंबई स्थित एयरपोर्ट पोर्ट हेल्थ ऑफिस में कराया था.
इसके बाद 14 दिसंबर को केंद्र का निरीक्षण किया. प्रशिक्षण और निरीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद टीकाकरण केंद्र को विशिष्ट कोड आवंटित किया. यह यलो फीवर टीकाकरण केंद्र अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों और भारत सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित किया जाएगा. यहां पात्र अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को मानकीकृत और प्रमाणित प्रक्रिया के तहत यलो फीवर का टीका लगाया जाएगा. वैक्सीन की आपूर्ति केंद्रीय अनुसंधान संस्थान, कसौली से की जाएगी, जिसके लिए प्रति व्यक्ति 300 रुपये शुल्क निर्धारित रखा गया है.
क्या है यलो फीवर, क्यों टीकाकरण है अनिवार्य..
अब तक यलो फीवर का टीकाकरण केवल मुंबई, दिल्ली जैसे बड़े शहरों के एयरपोर्ट पोर्ट हेल्थ ऑफिस या चुनिंदा अधिकृत केंद्रों पर ही किया जाता था. यलो फीवर एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलती है. इसमें तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, शरीर दर्द होता है और गंभीर मामलों में लिवर खराब होने से आंखों व त्वचा में पीलापन आ जाता है, इसी कारण इसे यलो फीवर कहा जाता है.
यह बीमारी मुख्य रूप से अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई देशों में पाई जाती है. यलो फीवर प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों से कई देश यलो फीवर वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट अनिवार्य रूप से मांगते हैं. बिना वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट के संबंधित देशों में एंट्री नहीं मिलती या यात्रियों को एयरपोर्ट पर मरंटीन किया जा सकता है. टीका लगने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य प्रमाण पत्र दिया जाता है, जो आमतौर पर जीवनभर के लिए वैध रहता है
